बरसों की मेहनत, लगन और समर्पण के बाद इसरो जब अपनी सबसे बड़ी परीक्षा दे रहा था, तो वैज्ञानिकों ही नहीं पूरे देश की सांसें थम सी गईं। जैसे-जैसे लैंडिंग का वक्त नजदीक आता गया, दुनियाभर में मौजूद हर भारतीय की बेचैनी बढ़ गई। एक-एक पल काटना भारी था। लगा वक्त जैसे ठहर गया हो।
जब शून्य कर दी गई थी रफ्तार
चांद की सतह पर उतरने की प्रक्रिया की अंतिम 15 मिनट बेहद चुनौतीपूर्ण थे। सतह से पांच किमी ऊपर उतरने की तैयारी कर रहे विक्रम की गति 331.2 किमी प्रति घंटे थी। इसे काबू करते हुए विक्रम को चांद की सतह से 2.1 किमी ऊंचाई तक लाया गया। यहां से इसकी गति शून्य कर दी गई, ताकि आहिस्ता-आहिस्ता उतारा जा सके।