इसरो ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से ‘विक्रम’ लैंडर को सफलतापूर्वक अलग किया। इसरो ने जानकारी दी है कि भारतीय समयानुसार सोमवार दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से अलग हुआ।
भारत इतिहास रचने जा रहा है। सात सितंबर की रात 1:30 बजे विक्रम और इसके भीतर मौजूद रोवर प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। इस प्रक्रिया में करीब 60 मिनट लगेंगे और यह 2:30 मिनट पर पूरी होगी। लैंडिंग के बाद सुबह 5:30 बजे से 6:30 बजे के बीच विक्रम से निकलकर प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर चलेगा और विभिन्न प्रयोग करेगा। विक्रम और प्रज्ञान दोनों विभिन्न प्रयोगों को पूरे एक चंद्र दिन (पृथ्वी केे 14 दिन) में अंजाम देंगे। इस दौरान उनका जोर बर्फ, धातु और खनिजों की खोज सहित चंद्रमा, पृथ्वी व सौरमंडल के इतिहास से जुड़े तथ्यों को तलाशने पर होगा।
इसरो के टेलीमैट्री, ट्रैकिंग व कमांड केंद्र से चंद्रयान-2 मिशन की हर क्षण निगरानी की जा रही है। इसरो ने बताया कि इस काम में बेंगलूरू के निकट ब्यालालु स्थित भारतीय गहन अंतरिक्ष नेटवर्क एंटीना से सहयोग लिया जा रहा है।