सहारनुपर की घटना के बाद दलितों के नए नायक बनकर उभरे चंद्रशेखर ने केंद्र की सत्ताधारी पार्टी से लेकर दलित राजनीति की सबसे बडे हितैषी मानी जाने वाली बसपा प्रमुख मायावती तक की चिंताए बढा दी हैं। घटते राजनीतिक प्रभाव से मायावती पहले से ही परेशान थी। अब उनके पुख्ता दलित वोट पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। यही वजह है कि मायावती अपने पुराने अंदाज में लौटने को बेताब हैं। लंबे अरसे बाद माया अपने पुराने अंदाज में नजर आएंगी। वहीं केंद्र सरकार भी दलित मतों को साधने के लिए कई नए कदम उठाने की तैयारी में है।
आधार बचाने सडक पर उतरेंगी माया
आधार बचाने सडक पर उतरेंगी माया
- फोटो : AmarUjala
भीम सेना प्रमुख चंद्रशेखर को दलित बिरादरी में मिल रही नई पहचान से परेशान मायावती लंबे अरसों बाद सड़क की राजनीति करती नजर आएंगी। विलासिता और हवाई राजनीति के आरोपों के बीच माया ने दोबारा से पुराने फार्म में लौटना तय किया है। सहारनपुर से दलित राजनीति को नया उभार देने की कवायद में बसपा प्रमुख मंगलवार 23 मई को शब्बीरपुर जाएंगी। हवाई यात्रा के बजाय माया ने दिल्ली से सड़क मार्ग के जरिए सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव जाने का निर्णय लिया है। बसपा ने बाकायदा मीडिया को बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी है कि मंगलवार सुबह मायावती दिल्ली स्थित सरकारी आवास से सड़क मार्ग के जरिए सहारनुर जाने का निर्णय लिया है। लंबे अरसे बाद सड़क पर माया के उतरने को दलित वोट बैंक बचाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा को भी सता रही दलितों की चिंता
भाजपा को भी सता रही दलितों की चिंता
केंद्र की सत्ताधारी दल भाजपा को भी दलितों की चिंता सता रही है। पीएम मोदी को दोबारा से गद्दी पर आसीन कराने के लिए लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भाजपा ने जो ताना—बाना बुना है, उसमें दलित मतों पर खास उसकी रणनीति टिकी हुई है। मायावती की कम होती लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा रणनीतिकार यह मान कर चल रहे थे कि 2019 में दलितों का वोट वो अपने पाले में खींच सकते हैं। पर दलितों के नए नायक के रूप में उभरे चंद्रशेखर ने 2019 के लिए पीएम मोदी के सामने भी मुश्किलें खडी कर दी हैं।
दलितों को साधने के लिए केंद्र की नए सिरे से कवायद
दलितों को साधने के लिए केंद्र की नए सिरे से कवायद
सूत्र बताते हैं कि अंबेडकर जयंती को धूम धाम से मनाने और भीम एप्प के बाद भी केंद्र सरकार दलितों को साधने के लिए नए सिरे से कार्यक्रम तैयार कर रही है। इस कवायद में केंद्र के सामाजिक एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नए सिरे से दलित महानुभावों को दिए जाने वाले पुरस्कार दोबारा से शुरू करने का निर्णय लिया है। 8 वर्ष के बाद इस वर्ष से इन पुरस्कारों की दोबारा से शुरूआत हो रही है। 26 मई को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी दलित समुदाय के प्रख्यात 4 व्यक्तियों को पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। बताया जा रहा है कि विभिन्न क्षेत्रों में बेहत्तर कार्य करने वाले 12 दलित हस्तियों का नाम चयन कर पीएमओ को भेजा है। इनमें से 4 हस्तियों को 26 मई को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। सरकार की इस कवायद को दलित मतों को साधने के प्रयास में देखा जा रहा है।
कौन हैं चंद्रशेखर?
सहारनपुर हिंसा को लेकर दिल्ली में दलितों का प्रदर्शन
- फोटो : ANI
दलितों के नए नायक बनकर उभरे चंद्रशेखर 5 मई को सहारनपुर में घटी जातीय संघर्ष की घटना के बाद से चर्चित हुए हैं। ठाकुर बिरादरी के खिलाफ भीम सेना का नेतृत्व करते हुए चंद्रशेखर ने जिस तरह रविवार 21 मई को दिल्ली के जंतर मंतर से पीएम मोदी और उनके दल को चुनौती पेश की है। उससे सरकार और दलित राजनीतिक की सबसे ज्यादा झंडा बुलंद करने वाली मायावती तक के होश उड गए हैं। सहारनपुर के एचपी कॉलेज से पढ़े चंद्रशेखर की उम्र 30 वर्ष है। सतीश कुमार के जरिए बीते 10 वर्ष पहले शिव सेना की तर्ज पर बनाई गई भीम सेना के मुखिया हैं। इस संगठन की लोकप्रियता इन दिनों उत्तरप्रदेश में खासी बढ़ रही है। करीब 40हजार से ज्यादा दलित इस संगठन के सदस्य बन चुके हैं।