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बड़ा राजनीतिक एजेंडा लेकर सप्ताह में दूसरी बार दिल्ली आए चंद्रबाबू नायडू

Thu, 01 Nov 2018 07:45 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू राजनीति में बड़े लक्ष्य के लिए जाने जाते हैं। लीक से हटकर चलने में नायडू को कोई परहेज नहीं होता। इसी इरादे से वह एक सप्ताह में बड़ा एजेंडा लेकर दूसरी बार दिल्ली आए और केन्द्रीय राजनीति में सक्रिय शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। नायडू का मकसद एक बार फिर राजनीति की धुरी बनना है और वह इस लक्ष्य को महागठबंधन के कुनबे में शामिल होकर पा लेना चाहते हैं।
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चंद्रबाबू नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद केंद्र की मोदी सरकार को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश की संवैधानिक संस्थाओं में ठीक नहीं चल रहा है। सीबीआई से लेकर आरबीआई तक बुरे दौर से गुजर रही हैं।

नायडू ने राहुल गांधी से भेंट करने के पहले एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार और नेशनल कांफ्रेस के फारुक अब्दुल्ला से मुलाकात के दौरान राजनीति के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं से मिलने के बाद चंद्रबाबू नायडू राहुल गांधी से मिले। कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात के समय वहां वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी थे और बताया जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए सकारात्मक चर्चा हुई है।
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आंध्र प्रदेश में तीन राजनीतिक दल(तेदेपा, कांग्रेस और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस) पहले से प्रभावी भूमिका में हैं। भाजपा वहां कमल का खाता खोलने की तैयारी कर रही है। चंद्रबाबू नायडू की तेदेपा को वाईएसआर कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिल रही है। इस लिहाज से भी चंद्र बाबू नायडू की कोशिशों को देखा जा रहा है।
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चंद्रबाबू नायडू, फारुक अब्दुल्ला, शरद पवार - फोटो : अमर उजाला
27 अक्तूबर को आए थे नायडू

चंद्रबाबू नायडू इससे पहले 27 अक्तूबर को दिल्ली आए थे। तब भी उनका मकसद महागठबंधन जैसी संभावना को बल देना था। ताकि केंद्र मोदी सरकार के खिलाफ बड़ी चुनौती खड़ी की जा सके। भाजपा तेलंगाना के साथ-साथ आंध्र प्रदेश में बड़े राजनीतिक अभियान को शुरू कर रही है। इसको देखते हुए भी चंद्रबाबू नायडू ने अपनी सक्रियता बढ़ाई है। पिछली यात्रा के दौरान उन्होंने शरद यादव, बसपा प्रमुख मायावती, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत अन्य से मिले थे। पिछली मुलाकात का मकसद भी मोदी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए राजनीतिक गठजोड़ खड़ा करना था।


विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों में सक्रिय रहते हैं नायडू

नायडू राजनीति के सफल खिलाड़ी हैं। हैदराबाद को आधुनिक बनाने के शिल्पी भी कहे जाते हैं। इतना ही नहीं तेलगू देशम पार्टी को नया आकार देने के भी शिल्पी हैं। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी भी अपने ससुर और विख्यात राजनेता, पूर्व अभिनेता एनटी रामाराव का विद्रोह करके हासिल की थी।

नायडू यूपीए सरकार के दौरान विपक्षी दलों की एकता बनाने के अभियान में शामिल थे। 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद उन्होंने भाजपा की सरकार को अपना समर्थन दिया और सरकार में शामिल हुए। लेकिन आंध्र प्रदेश में एक साल बाद चुनाव, विपरीत परिस्थिति देखकर नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न देने के केंद्र सरकार के रुख को देखकर इसी साल मानसून सत्र में अपना समर्थन वापस ले लिया। अब चंद्र बाबू नायडू एक बार फिर विपक्षी दलों के साथ महागठबंधन की जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
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