कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (फाइल फोटो)
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तेलुगू देशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू व पार्टी के 13 अन्य विधायकों को सोमवार को आंध्र प्रदेश विधानसभा के शीत सत्र के पहले ही दिन एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया है। आसन के समक्ष धरने पर बैठने के कारण इनके खिलाफ कार्रवाई हुई है। आंध्र प्रदेश विधानसभा में टीडीपी मुख्य विपक्षी दल है।
विधानसभा में पहला मौका था जब चंद्रबाबू नायडू भी आसन के सामने जमीन पर बैठ गए। इस पर मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज तक इस सदन में किसी नेता प्रतिपक्ष ने इस तरह का व्यवहार नहीं किया है। टीडीपी विधायक सदन के भीतर प्रमुख मुद्दों पर नहीं बोलने देने के लिए वाईएसआर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
इन मुद्दों में हाल ही में चक्रवात के कारण आई बाढ़ से किसानों को हुए नुकसान पर मुआवजे के भुगतान का मामला भी शामिल है। सदन में जैसे ही कृषि मंत्री के काना बाबू ने बयान दिया टीडीपी विधायकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। टीडीपी के उपनेता निम्माला रामानायडू को बाद में बोलने का मौका दिया गया।
रामानायडू की आलोचना पर बरसते हुए सीएम ने कहा टीडीपी सदस्य सदन में गुंडागर्दी कर रहे हैं। ये लोग मुद्दे को समझे बिना बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को दिसंबर अंत तक सब्सिडी देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस बीच चंद्रबाबू नायडू ने सीएम का जवाब देने के लिए बोलने की इजाजत मांगी मगर उन्हें मौका नहीं दिया गया। वाईएसआर कांग्रेस के विधायकों ने टीडीपी प्रमुख को बोलने से रोका तो विपक्षी विधायक आसन के समक्ष पहुंचकर धरने पर बैठ गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विधानसभा अध्यक्ष तमिनेनी सीताराम ने विपक्ष के विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने को कहा मगर वे नहीं माने। विवाद नहीं रुका तो विधायकी कार्य मंत्री बुग्गाना राजेंद्रनाथ ने टीडीपी विधायकों को एक दिन के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पेश किया जिसे ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई।