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Chandigarh Mayor Poll: पीठासीन अधिकारी की बीमारी, चुनाव में धांधली, दलबदल तक और अब AAP की जीत, कब क्या हुआ?

चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने बड़ा निर्णय दिया है। मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मेयर चुनाव में अमान्य किए गए 8 वोटों को मान्य माना। इसके बाद आम आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार को मेयर घोषित कर दिया गया। यह फैसला चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बेंच ने सुनाया है।

दरअसल, यहां 30 जनवरी को मेयर पद के लिए चुनाव हुए थे जिसमें भाजपा के मनोज सोनकर को विजयी घोषित किया गया था। हालांकि, आप प्रत्याशी कुलदीप कुमार ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए। इसके साथ ही आप ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। आखिरकार अदालत ने आप उम्मीदवार को विजेता घोषित किया है। 

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में क्या हुआ था? चुनाव में गड़बड़ी के आरोप क्यों लगे? मामला अदालत तक कैसे पहुंचा? अभी क्या हुआ है? सब कुछ टाइमलाइन के जरिए जानते हैं...
  • 18 जनवरी:
    चंडीगढ़ में हर साल मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव होते हैं। इनका कार्यकाल एक साल का ही होता है। 18 जनवरी को तीनों पद के लिए चुनाव होने थे।चुनाव के लिए सत्ताधारी भाजपा की ओर से मनोज सोनकर मेयर पद के उम्मीदवार बने। वहीं, सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए कुलजीत संधू तो डिप्टी मेयर पद के लिए राजिंदर शर्मा को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया।

    इन चुनावों से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन के दलों कांग्रेस और आप ने गठबंधन किया। इस समझौते के अनुसार, मेयर की सीट के लिए आप की तरफ से कुलदीप कुमार टीटा उम्मीदवार बने। वहीं, कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह गैबी और निर्मला देवी क्रमशः वरिष्ठ डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए चुनाव मैदान में उतारे गए।



    18 जनवरी को चंडीगढ़ नगर निगम के पार्षदों को मेयर पद के उम्मीदवारों के लिए वोट डालना था। इसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान होना था, लेकिन पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत खराब होने की खबर आई। इसके चलते अगली सूचना तक चुनाव को स्थगित कर दिया गया। इससे पहले तीनों पदों के लिए संबंधित उम्मीदवारों ने 13 जनवरी को नामांकन दाखिल किया था। 
  • 30 जनवरी: 
    18 जनवरी को स्थगित होने के बाद 30 जनवरी को चुनाव कराए गए। इस दिन हुए चुनाव को बाद भाजपा के उम्मीदवार मनोज सोनकर को मेयर घोषित कर दिया गया। आप और कांग्रेस के साझा उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। मनोज सोनकर ने INDIA गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप टीटा को 4 वोटों से हरा दिया। पीठासीन अधिकारी ने 8 वोट अमान्य करार दिए। इस पर आप और कांग्रेस ने पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह पर कई वोटों के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगाए। कांग्रेस और आप ने एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि अनिल मसीह वीडियो में कई वोटों पर पेन चलाते हुए नजर आए हैं। दावा किया गया कि वीडियो में भी इसके सबूत हैं। 
  • 5 फरवरी: 
    वीडियो के आधार पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने भाजपा पर चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। आम आदमी पार्टी के पार्षद व मेयर उम्मीदवार कुलदीप कुमार पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे लेकिन यहां कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 5 फरवरी को चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने रिटर्निंग अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि रिटर्निंग अधिकारी ने मतपत्रों को नष्ट किया है। कोर्ट ने सवाल पूछा कि क्या इसी तरह से चुनाव का आयोजन होता है? यह लोकतंत्र का मजाक है। यह जनतंत्र की हत्या है। पूरे मामले से हम हैरान हैं। इस अधिकारी पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। क्या यह रिटर्निंग अधिकारी का व्यवहार है? इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी तय की।
  • 18 फरवरी: 
    19 फरवरी को चंडीगढ़ मेयर चुनाव में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय थी। इससे पहले चंडीगढ़ की सियासत में बड़ी उठापटक हो गई। 18 फरवरी की शाम भाजपा की ओर से नवनिर्वाचित मेयर मनोज सोनकर ने इस्तीफा दे दिया। वहीं, रात में आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद भाजपा में शामिल हो गए। पार्षद पूनम देवी, नेहा मुसावत और गुरचरण काला दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए। इससे भाजपा के पास 14 की जगह 17 पार्षद हो गए।
  • 19 फरवरी: 
    मेयर चुनाव विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (19 फरवरी) को सुनवाई हुई। अदालत ने पीठासीन अधिकारी का बयान दर्ज किया और कहा कि पीठासीन अधिकारी ने नियमों का पालन नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। दूसरे पक्ष ने सुझाव दिया कि चूंकि मेयर ने इस्तीफा दे दिया है, इसलिए नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। 
  • 20 फरवरी: 
    चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में मंगलवार (20 फरवरी) को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने चुनाव में पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह द्वारा निशान लगाए गए बैलेट पेपर की जांच खुद की। कोर्ट ने मामले का वीडियो फुटेज भी देखा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बेंच ने आदेश दिया है कि मेयर चुनाव में अमान्य किए गए 8 बैलेट पेपर मान्य माने जाएंगे। जिसके बाद आप के कुलदीप कुमार को मेयर घोषित कर दिया गया।

    पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को 12 वोट मिले थे। 8 मतों को गलत तरीके से अमान्य करार दे दिया गया। बाद में ये 8 वोट याचिकाकर्ता के पक्ष में पाए गए। इस तरह 8 मतों को जोड़ देने पर याचिकाकर्ता के 20 वोट हो जाते हैं। लिहाजा, आप पार्षद और याचिकाकर्ता कुलदीप कुमार को चंडीगढ़ नगर निगम के महापौर पद पर निर्वाचित घोषित किया जाता है। पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह द्वारा भाजपा प्रत्याशी को विजेता घोषित करने का फैसला अमान्य है।