गर्भपात कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। 24 हफ्ते की गर्भवती महिला याचिकाकर्ता ने गर्भपात कराने की इजाजत मांगते हुए गर्भपात कानून को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि वह अटॉर्नी जनरल के दफ्तर जाकर नोटिस की तामील करें।
पीठ शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी। मालूम हो कि कानून 20 हफ्ते से अधिक के गर्भ को गिराने की इजाजत नहीं देता। पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता महिला की स्थिति को लेकर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट की दरकार है।
याचिका में महिला ने आरोप लगाया है कि उसके पूर्व प्रेमी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ बलात्कार किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। 20 हफ्ते से अधिक के गर्भ को गिराने की इजाजत नहीं देने का कानून अतार्किक, भेदभावपूर्ण और मनमाना है।