सुशील मोदी को बनाना था सीएम
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा को सुशील मोदी को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए था। उन्होंने कहा, सुशील मोदी प्रिय मित्र हैं। अगर भाजपा ने सुशील मोदी को मुख्यमंत्री बनाया होता तो चीजें आज की स्थिति में नहीं पहुंचती।
राजद को दिखाना होगा बड़ा दिल
सरकार चलाने के लिए राजद को दिल बड़ा करना होगा। उसे नीतीश को फ्री हैंड देना होगा। मगर जिस तरह गृह विभाग को लेकर तेजस्वी की बात नीतीश ने नहीं मानी, उससे पता चलता है कि टकराव की गुंजाइश है। फिर नीतीश और तेजस्वी को तेज प्रताप पर काबू रखना होगा।
भाजपा के विभाग राजद को
ऐसी खबरें थी कि कैबिनेट में गृह मंत्री का पद इस बार राजद को जा सकता है, लेकिन जदयू सूत्रों के अनुसार नीतीश ये पद इस बार भी अपने पास ही रखेंगे और मंत्रिमंडल के वो सारे महत्वपूर्ण विभाग राजद को दिए जाएंगे जो पहले भाजपा के पास थे।
राज्यसभा पर पड़ेगा बदलाव का असर, बीजद व वाईएसआर कांग्रेस पर बढ़ेगी भाजपा की निर्भरता
जदयू से राजग की जुदाई का असर राज्यसभा में भाजपा के समीकरण पर भी पड़ेगा। बहुमत से दूरी बढ़ने के कारण पार्टी को अहम बिलों को पारित कराने के लिए अब बीजद व वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों को साधे रखना होगा। भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि इन दोनों दलों ने राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव के साथ ही अब तक उच्च सदन में कई अहम मौके पर उसका साथ दिया है।
- जदयू के साथ रहते 237 सदस्यीय राज्यसभा में राजग सदस्यों की संख्या 115 तक पहुंच गई थी।
- जदयू के राजग से नाता तोड़ने के बाद अब चार मनोनीत व एक निर्दलीय सदस्य के समर्थन के साथ अब राजग के सदस्यों की संख्या 110
- सरकार शीतकालीन सत्र से पहले तीन और सदस्यों को मनोनीत कर सकती है। इन सदस्यों के समर्थन के बाद राजग सदस्यों की संख्या 113 होगी, मगर तब बहुमत का आंकड़ा 120 होगा।
- राजग को बहुमत के लिए सात और सदस्य चाहिए।
बीजद-वाईएसआर कांग्रेस से रिश्ते बेहतर
नई लोकसभा में भाजपा के बीजद व वाईएसआर कांग्रेस से रिश्ते बेहतर हैं। ऐसे में भाजपा के लिए उच्च सदन में तात्कालिक समस्या नहीं है। मुश्किलें तब बढ़ेंगी जब इन दोनों दलों में से कोई एक किसी बिल का विरोध करेगा।
उच्च सदन में नए उपसभापति के चुनाव पर भी हो सकता है निर्णय
अब राज्यसभा के उपसभापति को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। उपसभापति हरिवंश जदयू के सदस्य हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या नीतीश हरिवंश को पद से इस्तीफा देने के लिए कहेंगे? 14वीं लोकसभा में भी वाम दलों ने यूपीए-1 सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। तब माकपा के सोमनाथ चटर्जी स्पीकर थे। चटर्जी ने पार्टी के निर्देश के बावजूद यह कह कर इस्तीफा देने से इन्कार कर दिया था कि स्पीकर किसी दल का नहीं होता। इसके बाद माकपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।