सीजीएचएस सोसायटी घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने सात आरोपियों को दो साल जेल की सजा सुनाई है। आरोपियों ने 'लोक प्रिया सीजीएचएस' को धोखाधड़ी से दोबारा शुरू करने के लिए 'को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ के रजिस्ट्रार कार्यालय' के अधिकारियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची थी।
सीबीआई की नई दिल्ली स्थित कोर्ट ने लोक प्रिया को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (सीजीएचएस) को धोखाधड़ी से दोबारा शुरू करने के मामले में सात दोषियों को दो साल कैद की सजा सुनाई है। इनमें दो सरकारी कर्मचारी, को-ऑपरेटिव सोसायटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार आरके श्रीवास्तव और तत्कालीन असिस्टेंट रजिस्ट्रार पीएन मनचंदा व पांच अन्य आरोपी शामिल हैं। कठोर कैद के अलावा हर एक आरोपी पर 75000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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2006 में दर्ज हुआ था मामला
सीबीआई के अनुसार, इस मामले में पांच प्राइवेट व्यक्ति, केके वाधवा, अनिल कुमार, सुनील कुमार, देवेंद्र पाल सिंह और रवि सलूजा शामिल हैं। सरकारी कर्मचारियों को आपराधिक कदाचार के अपराध के लिए और प्राइवेट व्यक्तियों को धोखाधड़ी, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल और व आपराधिक साजिश रचने में सजा सुनाई गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने सितंबर 2006 में यह मामला दर्ज किया था। यह मामला 1970-1980 के दौरान रजिस्टर्ड उन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज को धोखाधड़ी से दोबारा शुरू करने से जुड़ा था, जो बंद हो चुकी थीं या जिनका काम-काज खत्म हो चुका था।
ऐसे रची गई साजिश
जांच में यह बात सामने आई कि प्राइवेट आरोपियों ने 'लोक प्रिया सीजीएचएस' को धोखाधड़ी से दोबारा शुरू करने के लिए 'को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ के रजिस्ट्रार कार्यालय' के अधिकारियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची थी। इसी साज़िश के तहत, आरोपियों ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से जमीन का आवंटन हासिल किया। जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 27.01.2008 को दिल्ली की संबंधित अदालत में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के बाद, अदालत ने 14 जुलाई को सभी आरोपियों को दोषी ठहराया और 30 जुलाई को उन्हें सजा सुनाई।