शिवसेना ने गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। शिवसेना ने गुरुवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह चाहती थी कि किसान आक्रोशित होकर हिंसक हो जाएं, जिससे तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी उनका प्रदर्शन बदनाम हो। शिवसेना ने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा पर कहा कि हिंसा राष्ट्रीय हित में नहीं है। वहीं, महाराष्ट्र की भाजपा इकाई ने शिवसेना के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें निराधार बताया है।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 60 दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डालकर कानूनों को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच कोई मतभेद नहीं था और ना ही उन्होंने अपना धैर्य खोया।
शिवसेना ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कुछ कर नहीं कर पा रही थी। वह चाहती थी कि किसान आक्रोशित होकर हिंसक हो जाएं, ताकि उनका प्रदर्शन बदनाम हो। 26 जनवरी को उसकी यह इच्छा पूरी हो गई, लेकिन इससे देश की भी बदनामी हुई। उसने कहा कि यह कहना आसान है कि किसानों ने कानून हाथ में लिया, लेकिन वे जो कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, उसका क्या?
पार्टी ने दावा किया कि पंजाब के किसानों के स्वाभिमान से केंद्र परेशान है। उसने कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं। सरकार जो चाहती थी, वह हुआ, लेकिन इसका खामियाजा किसानों और पुलिस को भुगतना पड़ा।