यह नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित चौथा ऐसा भर्ती अभियान है, जिसने 2018 में नई प्रतिभाओं को लाने और जनशक्ति की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए लैटरल एंट्री (सरकारी विभागों में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की नियुक्ति) की शुरुआत की थी। आमतौर पर संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव के पद अखिल भारतीय और समूह 'ए' सेवाओं के अधिकारियों के पास होते हैं।
कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, यह नवीनतम भर्ती स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, ऊर्जा मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत ग्रामीण विकास विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और सांख्यिकी मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग में होगी।
प्रस्तावित भर्ती 20 ऐसे विशेषज्ञों (जिनमें चार संयुक्त सचिव, 16 निदेशक और उप सचिव शामिल हैं) के अतिरिक्त हैं, जिन्हें लैटरल एंट्री के जरिए शामिल किया जाना है। बयान में कहा गया है कि अब डीओपीटी से प्राप्त मांग के अनुसार, यूपीएससी अनुबंध के आधार पर लैटरल एंट्री के जरिए 17 अतिरिक्त पदों को भरेगा, जिसमें तीन संयुक्त सचिव और 14 निदेशक और उप सचिव शामिल हैं।
अभ्यर्थियों के लिए विस्तृत विज्ञापन और निर्देश तीन जून को आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। बयान में कहा गया है कि इच्छुक अभ्यर्थी 3 जून से 3 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। इसमें कहा गया है कि अभ्यर्थियों को उनके ऑनलाइन आवेदनों में उनके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर साक्षात्कार के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा और उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी जानकारी सही है।
कार्मिक मंत्रालय ने जून 2018 में पहली बार लैटरल एंट्री के माध्यम से संयुक्त सचिव रैंक के 10 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इन पदों के लिए भर्ती भी यूपीएससी ने ही की थी। आयोग ने अक्तूबर 2021 में फिर से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव (3), निदेशक (19) और उप सचिव (9) के रूप में नियुक्ति के लिए 31 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी। 20 मई को यूपीएससी द्वारा एक विस्तृत विज्ञापन जारी करने के साथ तीसरी बार ऐसी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी।