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दुर्लभ जड़ी-बूटियों की खोज में राज्यों को मदद करेगा केंद्र

Sun, 13 Mar 2016 09:10 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/ अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • 30 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है
  • 11 राज्यों से 5000 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और पुस्तकों का सर्वे
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अायुष मंत्रालय
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विस्तार
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आयुष मंत्रालय संजीवनी के समान दुर्लभ जड़ी-बूटियों की खोज में राज्यों की मदद करेगा। मंत्रालय ने इस काम में सहायता के लिए कार्ययोजना तय की है। केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद ने प्राचीन आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के पुनरुद्धार और उनके फिर से प्रकाशन की मुहिम तेज की है।
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इसके तहत दुर्लभ पांडुलिपियों से 30 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। इनमें अभिनव चिंतामणि, अष्टांग संग्रह, भेला संहिता, चारूचर्या, धनवंतरी सार निधि, रसचंद्रांशु, सहस्रयोग,वैध मनोरमा, वैद्यक संग्रह और वैद्यक प्रयोग विज्ञानम जैसी पुस्तकें शामिल है। अब जम्मू कश्मीर के लेह समेत 11 राज्यों से 5000 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों और पुस्तकों का सर्वे कर उनके प्रकाशन के लिए मंजूरी दी गई है।

वर्तमान में देश भर में सिर्फ छह प्रतिशत आबादी भारतीय चिकित्सा पद्धति से इलाज कराती है। राष्ट्रीय सेंपल सर्वे द्वारा स्वास्थ्य संबंधी सामाजिक उपभोग पर कराए गए सर्वे के मुताबिक आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है लेकिन यह अब भी कम है।
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आयुष मंत्रालय ने प्राचीन पद्धतियों के विकास की कार्ययोजना बनाई है। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद ने दुर्लभ और अनमोल प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने के लिए 31 संस्थानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है।पारंपरिक चिकित्सा और अनुसंधान केंद्र ने सिद्ध पद्धति की ताड़ पत्रों की 268 दुर्लभ पांडुलिपियों को संग्रहण कर उसे स्वीकृति दी है। इसके अलावा तमिल क्लारिची कजगम चैन्ने ने सिद्ध औषधियों से संबंधित प्राचीन पांडुलिपियों से पुस्तक के 8 खंड प्रकाशित किए हैं। 
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50 पांडुलिपियों का पुस्तक के रूप में प्रकाशन का निर्णय

आयुर्वेदिक औषधी
केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने यूनानी पद्धति की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण का अभियान शुरू किया है। इनमें 50 पांडुलिपियों का पुस्तक के रूप में प्रकाशन का निर्णय लिया गया है। ये सभी पांडुलिपियां, उर्दू, अरबी और फारसी में हैं।

राष्ट्रीय औषधीय बोर्ड ने आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धति के विकास के लिए केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम शुरू किया है इसके तहत उत्तराखंड और अन्य राज्यों को जड़ी -बूटियों की खोज और उनके संरक्षण में केंद्रीय मदद बढ़ाने का प्रस्ताव है। उत्तराखंड में चिकित्सा वानस्पतिक सर्वे शुरू कराया जा रहा है। अब तक हर्बल वेल्थ आफ उत्तराखंड नामक पुस्तक के दो खंड प्रकाशित हो चुके हैं।

आयुर्वेदिक औषधियों का निर्यात बढ़ेगाआयुष मंत्रालय ने आयुर्वेदिक औषधियों का निर्यात बढ़ाने का निर्णय लिया है। वर्तमान में 150 देशों में इन औषधियों का निर्यात होता है। वैश्विक बाजार पर पकड़ बनाने के लिए इन औषधियों में विकास की और संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। औषधि निर्माताओं, उद्यमियों और आयुष संस्थान के प्रतिनिधियों को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और मेले में भी भेजने की योजना है।
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