चीनी के लोकप्रिय विकल्प एरिथ्रिटोल से स्ट्रोक का खतरा
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त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार ने चीनी के स्टॉक पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। 1 से 14 अगस्त तक देशभर की चीनी मिलों में मौजूद चीनी के भौतिक स्टॉक का सत्यापन कराया जाएगा। सरकार का मकसद बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना, जमाखोरी पर रोक लगाना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के तहत चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय ने सभी चीनी मिलों को इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके तहत केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की संयुक्त टीमें मिलों में पहुंचकर वास्तविक चीनी स्टॉक का भौतिक सत्यापन करेंगी।
जांच के दौरान जून 2026 के पी-2 स्टॉक रिटर्न को आधार माना जाएगा। इसके बाद जुलाई में हुई चीनी की बिक्री और डिस्पैच का मिलान कर वास्तविक स्टॉक की जांच होगी। यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया जाता है तो इसे शुगर कंट्रोल आर्डर का उल्लंघन माना जाएगा।
सरकार ने साफ किया है कि स्टॉक में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित चीनी मिल के खिलाफ एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 और शुगर कंट्रोल आर्डर 2025 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इतना ही नहीं, जुलाई 2026 की बिक्री के आंकड़ों का जीएसटी डेटा से भी मिलान किया जाएगा। अगर इसमें भी विसंगति पाई गई तो संबंधित चीनी मिल को अक्टूबर 2026 का घरेलू चीनी कोटा आवंटित नहीं किया जा सकता। इसके अलावा लागू कानूनों के तहत अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकार ने सभी चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि बिक्री और डिस्पैच का पूरा रिकॉर्ड सही तरीके से दर्ज रखें और निरीक्षण के दिन उपलब्ध वास्तविक स्टॉक का रिकॉर्ड से पूरा मिलान होना चाहिए।