केंद्र ने कुछ स्पष्टीकरण की मांग करते हुए राजस्थान और मणिपुर के लिंचिंग विरोधी बिल संबंधित राज्य सरकार को वापस कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में यह बात कही कि क्या केंद्र सरकार दो विधेयकों के संबंध में समीक्षा और परामर्श प्रक्रिया में देरी कर रही है। सरकार को 'द राजस्थान प्रोटेक्शन फ्रॉम लिंचिंग बिल 2019' और 'द मणिपुर प्रोटेक्शन फ्रॉम मॉब वायलेंस बिल 2018' मिले हैं।
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राय ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में कहा कि नोडल मंत्रालयों और विभागों के साथ परामर्श के बाद राजस्थान सरकार और मणिपुर सरकार से 12 अक्टूबर 2021 और 18 नवंबर 2021 को कुछ स्पष्टीकरण मांगे गए हैं। राजस्थान विधानसभा ने अगस्त 2019 में विधेयक पारित किया और इसमें पीड़ित की मौत के कारण मॉब लिंचिंग के मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को आजीवन कारावास और 1-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
मणिपुर विधानसभा ने दिसंबर 2018 में विधेयक पारित किया और भीड़ की हिंसा में किसी की मौत होती है तो इसमें शामिल लोगों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान करता है।