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तैयारी: ड्रोन से कोरोना टीके की आपूर्ति का ट्रायल 18 जून से करेगी सरकार, लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

Sun, 13 Jun 2021 03:49 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोदी सरकार देश के  सुदूर इलाकों में वैक्सीन अभियान को गति देने के लिए नई योजना पर काम रही है। सरकार दुर्गम और कठिन इलाकों में ड्रोन के जरिए कोरोना  वैक्सीन पहुंचाएगी। 
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Pfizer Coronavirus Vaccine - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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भारत में ड्रोन के जरिये कोरोना टीका और दवा की आपूर्ति करने का ट्रायल 18 जून से बंगलूरू के पास गौरीबिदानूर में शुरू होगा। इस काम के लिए थ्रॉटल एयरोस्पेस सिस्टम्स (टीएएस) को नागर विमानन निदेशालय ने मार्च 2020 में ही मंजूरी दे दी थी, लेकिन कोराना महामारी के कारण इसमें देरी हुई। 

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इसके ट्रायल के लिए सभी मंजूरी मिल जाने के बाद कंपनी 18 जून से एक से डेढ़ महीने के लिए पहला ट्रायल शुरू करेगी। मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ दवी शेट्टी ने इस ट्रायल का समर्थन किया है। वहीं नारायणा हेल्थ इस ट्रायल में भागीदारी ओर इसके लिए दवा आदि प्रदान करेगी।

देश में कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने देश के सुदूर इलाकों में ड्रोन से वैक्सीन पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। दुर्गम और कठिन रास्ते होने के चलते देश के कुछ हिस्सों में तय समय पर टीके नहीं लग पा रहे हैं। ऐसे में सरकार बड़ी योजना बनाते हुए यह पहल शुरू की है।  आईआईटी कानपुर की ओर से किए गए शोध में ऐसा संभव हुआ है। 
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इंडिया काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से एचएलएल इन्फ्रा टेक सर्विसेज लिमिटेड ने 11 जून को इस संबंध में अनमैन्ड एरियल व्हीकल या ड्रोन के जरिए वैक्सीन पहुंचाने के लिए टेंडर भी आमंत्रित की हैं। कंपनी ने आवेदन के लिए प्रपत्र भी जारी कर दिया है। अभी सिर्फ तेलंगाना में ही ड्रोन के जरिए कोरोना वैक्सीन पहुंचाने का काम कर रहा है। 

4 किलोग्राम तक वजन उठाने में सक्षम होगा ड्रोन
एचएलएल ने बताया ड्रोन 100 मीटर की ऊंचाई पर कम-से-कम 35 किलोमीटर की हवाई दूरी तय करने में सक्षम होना चाहिए। इसके अलावा यह कम-से-कम 4 किलोग्राम का वजन उठाने और वापस अपने केंद्र पर आने में सक्षम होना चाहिए। एचएलएल ने यह भी साफ कर दिया है कि पैराशूट आधारित डिलिवरी को प्रमुखता नहीं दी जाएगी। आईसीएमआर ने आईआईटी-कानपुर के साथ मिलकर इस संबंध में एक शोध किया है। इसमें यह देखा गया है कि क्या ड्रोन के जरिए देश के दुर्गम इलाकों में कोरोना वैक्सीन पहुंचाई जा सकती है। 

दो महीने पहले ही मिली थी मंजूरी
बता दें कि दो महीने पहले ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने आईसीएमआर को ड्रोन से कोरोना वैक्सीन डिलिवरी करने को लेकर अध्ययन करने की मंजूरी दी थी आईसीएमआर ने इस प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी-कानपुर के साथ साझेदारी की है। केंद्र सरकार के मुताबिक, आईसीएमआर को मिली यह छूट एक साल के लिए वैध है। 

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