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केंद्र ने पहचान सत्यापन के लिए जारी किए नए नियम: अगर आधार नहीं तो भी नहीं रुकेगा सरकारी लाभ, क्या बदलाव हुए?

Fri, 16 Oct 2026 06:22 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 14 अक्तूबर 2026 को आधार आधारित पहचान सत्यापन से जुड़े नए नियम अधिसूचित किए हैं। आधार नहीं होने पर वैकल्पिक दस्तावेजों और बायोमेट्रिक सत्यापन में विफलता से निपटने की व्यवस्था का उल्लेख है। पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं से वंचित होने से बचाने पर जोर दिया गया है। लेकिन कौन से दस्तावेज मान्य होंगे? सत्यापन विफल होने पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी?

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आधार पहचान पर केंद्र के नए नियमों में क्या है खास? - फोटो : सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन लाइव
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों की पहचान सत्यापित करने और आधार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में बताया गया है कि आधार उपलब्ध नहीं होने पर नामांकन के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसमें पहचान की जांच करने, बायोमेट्रिक सत्यापन में नाकामी की स्थिति से निपटने और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं के फायदे से वंचित होने से बचाने के प्रावधान शामिल हैं। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान वास्तविक लाभार्थियों के हितों की रक्षा करना है।

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भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के मुताबिक, ये नियम उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं जो सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार आधारित पहचान सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरते हैं। अधिसूचना में आधार संख्या उपलब्ध नहीं होने पर नामांकन के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, पहचान की पुष्टि करने और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में समस्या आने पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। इन प्रावधानों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी परेशानी या आधार उपलब्ध नहीं होने के कारण पात्र व्यक्ति सरकारी सहायता से वंचित न रह जाएं।

आधार उपलब्ध नहीं होने पर कौन से दस्तावेज काम आएंगे?

  • अधिसूचना में कहा गया है कि आधार संख्या उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में नामांकन के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे उन लोगों के लिए पहचान सत्यापन की प्रक्रिया का रास्ता खुलता है, जिनके पास आधार संख्या नहीं है या जो किसी कारण से इसे उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
  • हालांकि, उपलब्ध अधिसूचना के इस हिस्से में वैकल्पिक दस्तावेजों की पूरी सूची नहीं दी गई है। इसलिए किसी खास दस्तावेज को हर स्थिति में मान्य मानने से पहले संबंधित योजना के नियमों को देखना जरूरी होगा। मुख्य उद्देश्य यह है कि पहचान साबित करने के लिए आधार उपलब्ध न होने पर भी पात्र व्यक्ति के आवेदन पर विचार किया जा सके।

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बायोमेट्रिक सत्यापन में गड़बड़ी होने पर क्या होगा?

  • आधार आधारित पहचान की प्रक्रिया में बायोमेट्रिक सत्यापन भी शामिल हो सकता है। इसमें व्यक्ति की पहचान की पुष्टि के लिए उसकी शारीरिक पहचान से जुड़े विवरण का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जब यह सत्यापन सफल नहीं होता, तो लाभार्थी के सामने समस्या पैदा हो सकती है। नई अधिसूचना में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रक्रिया निर्धारित करने की बात कही गई है।
  • इसका उद्देश्य यह है कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में नाकामी को अपने आप किसी व्यक्ति के अपात्र होने का आधार न बना दिया जाए। हालांकि, अधिसूचना के उपलब्ध विवरण में सत्यापन विफल होने पर अपनाए जाने वाले हर कदम का अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया गया है।


क्या पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकेगा?
नए नियमों में इस बात पर जोर दिया गया है कि पहचान सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान पात्र लाभार्थियों को योजनाओं के लाभ से वंचित होने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय किए जाएं। इसका मतलब है कि आधार से जुड़ी दिक्कत या बायोमेट्रिक सत्यापन में परेशानी होने पर पात्र लोगों के हितों की रक्षा करने की व्यवस्था पर ध्यान दिया गया है। सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में पहचान की पुष्टि जरूरी हो सकती है, लेकिन सत्यापन की प्रक्रिया में आने वाली समस्या और लाभ पाने की पात्रता को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है। अधिसूचना में इसी तरह की स्थितियों से निपटने के लिए प्रावधान शामिल किए गए हैं। हालांकि, किसी विशेष योजना में इन नियमों को लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया उपलब्ध अंश में नहीं बताई गई है।

नए नियमों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की 14 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना में आधार आधारित पहचान सत्यापन को लेकर वैकल्पिक दस्तावेजों, पहचान की पुष्टि और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में विफलता से निपटने की व्यवस्था का उल्लेख है। इन नियमों का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पहचान सत्यापन के दौरान आने वाली तकनीकी या दस्तावेज संबंधी समस्याओं के कारण पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का फायदा मिलने में बाधा न आए। हालांकि, उपलब्ध अधिसूचना के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि हर योजना में दस्तावेजों की शर्तें एक जैसी होंगी। लाभार्थियों को संबंधित योजना के लागू नियमों के अनुसार ही पहचान और पात्रता से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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