केंद्र सरकार में वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, हम अपने बहुत से खर्च कम कर रहे हैं। ऐसी ही सलाह राज्यों को भी दी गई है। कोरोना के बाद सभी सरकारों पर आर्थिक दबाव बन गया है। ऐसे में केंद्र सरकार कम प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च और गैरयोजना व्यय, दोनों को घटा रही है।
केंद्र सरकार के अधिकारी का कहना है कि राज्यों में केंद्र के सहयोग से जिन अहम योजनाओं पर काम चल रहा है, उनके व्यय में किसी तरह की कटौती नहीं होगी। साथ ही राज्यों को यह इशारा भी कर दिया गया है कि केंद्र सरकार प्रायोजित परियोजनाओं में राज्यों के हिस्से का बोझ वहन नहीं करेगी।
इस बाबत सभी केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों से कहा गया है कि वे राज्यों को फंड जारी करने से पहले उसके विभिन्न पहलुओं पर गौर करें। यह अवश्य देखें कि पहले जारी हुई राशि खर्च हुई है या नहीं।
केंद्र सरकार ने यह बात साफ कर दी है कि इस मामले में राज्यों की जो योजनाएं पहले से स्वीकृत हैं, उनके बजट को लेकर कोई कटौती नहीं की जाएगी। बहुत सी ऐसी योजनाएं हैं, जिनमें खर्च का कुछ हिस्सा केंद्र वहन करता है।
ऐसे मामले में यदि कोई राज्य सरकार केंद्र द्वारा जारी राशि तय समय पर खर्च पर खर्च नहीं कर पाती हैं तो उस हिस्से का वित्तपोषण नहीं होगा। ऐसी कोई योजना, जो केंद्र द्वारा प्रायोजित है, उसमें केंद्र सरकार प्रदेश के हिस्से का बोझ नहीं उठाएगी।
उस बाबत अपना हिस्सा राज्य को ही देना होगा। लॉकडाउन के बाद केंद्र सरकार के बहुत से विभागों में कम प्राथमिकता वाले खर्च कम किए जा रहे हैं। साथ ही, गैर योजना व्यय भी घटाया जा रहा है।