Nari Adalat: केंद्र सरकार ने 'नारी अदालत' कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रस्ताव मांगे हैं, जो वर्तमान में असम और जम्मू-कश्मीर में पायलट परियोजना के रूप में लागू है।
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 'नारी अदालत' कार्यक्रम का विस्तार करने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। यह कार्यक्रम अभी असम और जम्मू-कश्मीर में पायलट परियोजना के रूप में लागू किया जा रहा है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मंगलवार को कही।
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'नारी अदालत' मिशन शक्ति के तहत 'संबल' उप-योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज विवाद, बाल हिरासत आदि जैसे छोटे विवादों को ग्राम पंचायत स्तर पर सुझलाने के लिए वैकल्पिक मंच प्रदान करना है। इसमें मध्यस्थता, बातचीत और सुलह के जरिए समस्याओं का समाधान किया जाता है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 में अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जाएगी। वित्त वर्ष 2024-25 में यह पायलट परियोजना के रूप में बिहार और कर्नाटक में शुरू की गई थी।
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उन्होंने बताया कि 'नारी अदालत' योजना महिला सशक्तिकरण के लिए एक जरूरी कदम है और यह समाज में न्यायिक विवादों को सुलझाने में सहायक होगी। उन्होंने राज्य सरकारों से कम से कम दस ग्राम पंचायतों में इस योजना को पालयट परियोजना के आधार पर लागू करने का प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया। मंत्री ने कहा, नारी अदालत योजना एक अहम कदम है, जो महिला शक्ति का उपयोग करके छोटे विवादों को हल करने के लिए एक वैकल्पिक मंच प्रदान करती है। उम्मीद है कि इससे समाज पर सकारात्मक असर पड़ेगा और यह अनावश्यक और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से बचने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि 2025-26 के केंद्रीय बजट में महिलाओं के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस बजट में महिलाओं के लिए 8.86 फीसदी आवंटन किया गया है, जो पिछले साल के 6.8 फीसदी के मुकाबले ज्यादा है। मंत्री ने यह भी बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के लिए अपने बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आवंटित किया है।