पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में सजा काट रहे सभी सात दोषियों को जेल से रिहाई नहीं मिलेगी। केंद्र सरकार ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि तमिलनाडु सरकार ने 2016 में ऐसा प्रस्ताव दिया था, जिसे मद्रास हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट का मानना था कि ऐसा करना एक 'खतरनाक मिसाल' पेश करना होगा।
सीबीआई भी दोषियों को रिहा करने के खिलाफ थी, जिसके बाद 18 अप्रैल, 2018 को केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रस्ताव खारिज करने की जानकारी दी थी। जेल में बंद सात दोषियों में से चार विदेशी नागरिक हैं। गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में लिखा था, 'ऐसा करने से एक खतरनाक मिसाल पेश होगी और भविष्य में इस तरह के अपराधियों को छोड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय मांग भी उठेगी।'
मद्रास हाई कोर्ट में सात में से एक दोषी नलिनी श्रीहरन की याचिका पर सुनवाई हुई। इसी दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल जी राजगोपालन ने गृह मंत्रालय के पत्र की एक कॉपी को जस्टिस आर सुबैया और जस्टिस आर पोंगियाप्पन की पीठ को सौंपी। नलिनी ने अपनी याचिका में कहा था कि उसे अवैध तरीके से वेल्लोर की जेल में रखा गया है क्योंकि राज्य सरकार ने उस समेत अन्य दोषियों की रिहाई की सिफारिश की है।