वक्फ को लेकर केंद्र ने संसद में दिया जवाब
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केंद्र सरकार ने साल 2019 से वक्फ बोर्ड को कोई जमीन नहीं दी है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सोमवार को राज्यसभा ये जानकारी दी। राज्यमंत्री तोखन साहू ने एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि जमीन राज्य का विषय है और केंद्र सरकार के पास राज्य सरकारों द्वारा दी गई जमीन का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां तक केंद्र सरकार का सवाल है तो केंद्र के अंतर्गत आने वाले आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2019 से कोई जमीन वक्फ बोर्ड को नहीं दी है।
वक्फ संशोधन विधेयक लेकर आई है सरकार
गौरतलब है कि सरकार ने अगस्त में संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया है, जिसे विपक्ष के विरोध के बाद गहन चर्चा के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य मस्जिदों के कामकाज में हस्तक्षेप करना नहीं है, लेकिन विपक्ष इसे केंद्र द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने और संविधान पर हमले के रूप में प्रचारित कर रहा है। बीते सप्ताह ही वक्फ संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि समिति ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली विवादित वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा मांगा है। वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी की बैठक बीती 5 दिसंबर को हुई थी। हाल ही में इस जेपीसी का कार्यकाल बढ़ाकर बजट सत्र के अंतिम सप्ताह तक किया गया है।
समुद्र तट के किनारे चार सौ एकड़ जमीन पर वक्फ का दावा
वक्फ संशोधन विधेयक इन दिनों चर्चा में है। इस बीच केरल के वक्फ बोर्ड ने एर्नाकुलम जिले में कोच्चि से 38 किलोमीटर दूर अरब सागर के किनारे स्थित मुनम्बम में 404 एकड़ जमीन पर अपना दावा कर दिया है। जिस जमीन पर दावा किया गया है, वहां 510 ईसाई और 100 हिंदू परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने फारूक कॉलेज मैनेजमेंट से यह जमीन खरीदी थी, लेकिन साल 2019 में वक्फ बोर्ड ने उनकी जमीन वक्फ संपत्ति के तौर पर रजिस्टर कर ली। अब वक्फ बोर्ड सरकार से जमीन से लोगों को बेदखल करने की मांग कर रहा है।