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जवाब: टीकाकरण नीति पर केंद्र ने दायर किया हलफनामा, सुप्रीम कोर्ट से कहा- हस्तक्षेप न करें

Tue, 11 May 2021 12:56 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में टीकाकरण नीति का बचाव करते हुए कहा कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप ना के बराबर है।
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supreme court - फोटो : ANI
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विस्तार
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टीकाकरण नीति और कोरोना से निपटने की तैयारी को लेकर लगातार घिर रही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना बचाव किया है। रविवार देर रात केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर किया और कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जगह नहीं है। 

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केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में लिखा कि वैश्विक महामारी के संदर्भ में, न्यायिक हस्तक्षेप की बहुत कम जरूरत है। केंद्र ने अपने हलफनामे में साफ तौर पर लिखा कि 18-44 साल के लोगों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि राज्य उसकी मांग कर रहे थे। वहीं केंद्र ने वैक्सीन निर्माताओं से राज्यों से वैक्सीन की एक ही कीमत वसूलने को कहा है। 

बता दें कि वैक्सीन निर्माता केंद्र सरकार को एक डोज 150 रुपये मेंदे रहे हैं, वहीं राज्यों को टीके की एक डोज के लिए 300-400 रुपये की कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि उसे वैक्सीन की कीमत इसलिए कम देनी पड़ रही है क्योंकि केंद्र ने बड़ी संख्या में टीके का ऑर्डर दिया है। 
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अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है कि केंद्र सरकार ने अपने व्यापक टीकाकरण अभियान के लिए वैक्सीन के बड़े-बड़े ऑर्डर दिए। इसलिए इसका सीधा असर कीमत पर पड़ रहा है। हालांकि केंद्र ने यह भी कहा कि इससे जनता की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि सभी राज्यों ने मुफ्त में वैक्सीन देने का एलान कर दिया है। 

इसके अलावा केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा कि कोरोना को लेकर जरूरी दवा और मेडिकल उपकरण के वितरण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले में किसी तरह का कोई आदेश पारित ना करें। केंद्र सरकार ने कहा कि इस महामारी को लेकर सभी नीतियां जानकारों और वैज्ञानिकों की सलाह से तय हो रही हैं। ऐसे में न्यायिक हस्तक्षेप की जगह बहुत कम है। 

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