जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केंद्र सरकार ने जेल में बंद शाह की पार्टी जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (जेकेडीएफपी) को अवैध संगठन घोषित करने के पर्याप्त साक्ष्य की जांच के लिए एक न्यायाधिकरण का गठन किया है। दिल्ली हाईकोर्ट के जज सचिन दत्ता की अध्यक्षता वाला न्यायाधिकरण इस बात का पता लगाएगा कि जेकेडीएफपी को गैरकानूनी संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को इस आशय की अधिसूचना जारी करते हुए इस न्यायाधिकरण के गठन की घोषणा की। दरअसल मंत्रालय ने इस महीने के शुरू में जेकेडीएफपी को गैरकानूनी संगठन घोषित किया था। अधिसूचना में कहा गया है, जम्मू एवं कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी को 5 अक्तूबर, 2023 को गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया था। अब गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने इस टिब्यूनल का गठन किया है।
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में जेकेडीएफपी को भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक गतिविधियों के लिए यूएपीए कानून 1967 के तहत पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। हुर्रियत कांफ्रेंस से जुड़े जेकेडीएफपी की स्थापना 1998 में अलगाववादी शबीर अहमद शाह की अगुवाई में हुई, जो अभी जेल में है।
1998 में शाह द्वारा स्थापित जेकेडीएफपी अलगाववादी समूह हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का एक घटक थी। बता दें, शाह फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) शाह को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 25 जुलाई 2017 को गिरफ्तार किया था। एनआईए ने भी शाह पर टेरर-फंडिंग मामले में भी आरोप पत्र दायर किया है। नवंबर 2022 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत श्रीनगर स्थित शाह के घर को कुर्क कर लिया था।
जेकेडीएफपी को प्रतिबंधित संगठन घोषित करते हुए, गृह मंत्रालय ने कहा था कि शब्बीर शाह ने कश्मीर को एक विवाद बताया और भारतीय संविधान को मानने से इनकार कर दिया। मंत्रालय का कहना है कि जेकेडीएफपी के सदस्य अलगाववादी गतिविधियों में सबसे आगे रहे हैं और जम्मू-कश्मीर को एक अलग इस्लामिक देश बनाने के पक्षधर रहे हैं।