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जल्लीकट्टू पर केंद्र ने अध्यादेश को दी मंजूरी

Sat, 21 Jan 2017 04:27 AM IST
एजेंसी/ चेन्नई/नई दिल्ली 
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जल्लीकट्टू के आयोजन पर लगी रोक के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को इस खेल के आयोजन के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही अध्यादेश को राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है। अब तमिलनाडु सरकार को अध्यादेश का एलान करना है। अध्यादेश का प्रस्ताव तमिलनाडु के सीएम ओ पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार को ही केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा था। इससे पहले बृहस्पतिवार को वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिले थे।
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पन्नीरसेल्वम ने शुक्रवार को अध्यादेश का प्रस्ताव राजनाथ सिंह को सौंपा था। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर तेजी से कार्यवाही की और देर रात विधि और पर्यावरण मंत्रालय ने इसे अपनी मंजूरी दे दी। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता के अनुसार अध्यादेश को राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है।

प्रवक्ता के अनुसार इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजने की जरूरत नहीं थी। उम्मीद है कि राज्य सरकार शनिवार सुबह अपनी मंजूरी के साथ अध्यादेश राज्यपाल विद्यासागर राव के पास भेज देगी। इसके बाद राज्यपाल पशु निर्ममता निवारण अधिनियम में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश लाएंगे और इसके बाद अध्यादेश की घोषणा हो जाएगी।
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जल्लीकट्टू से रोक हटाने के लिए पिछले पांच दिनों से हो रहा प्रदर्शन

जल्लीकट्टू - फोटो : SELF
उधर, तमिलनाडु में मरीना बीच पर जल्लीकट्टू से रोक हटाने के लिए पिछले पांच दिनों से प्रदर्शन हो रहा है। शुक्रवार को प्रदर्शन में करीब एक लाख लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन में छात्र मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। अध्यादेश को हरी झंडी मिलने का प्रदर्शनकारियों ने स्वागत किया है। साथ ही उन्होंने कहा है कि वे तब तक प्रदर्शन जारी रखेंगे जब तक की प्रदेश में जल्लीकट्टू का आयोजन नहीं होता। 

इससे पहले दिन में पन्नीरसेलवम ने कहा था कि जल्लीकट्टू की इजाजत देने के लिए एक-दो दिन में अध्यादेश लाया जाएगा और इसके आड़े आने वाली किसी भी अड़चन से निपटने के लिए कानूनी कदम उठाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद और अनिल माधव दवे ने कहा था कि केंद्र सरकार जल्लीकट्टू के मसले का स्थायी और कानूनी हल तलाश रही है। 

दक्षिण भारतीय फिल्मों के अभिनेता रजनीकांत, कमल हसन और पवन कल्याण ने भी जल्लीकट्टू से रोक हटाने की मांग की थी। उधर, मद्रास हाईकोर्ट ने जल्लीकट्टू के आयोजन के लिए शर्तों के साथ विशेष कानून बनाने का केंद्र और तमिलनाडु की सरकार को निर्देश देने के लिए दायर जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि वह इस तरह का निर्देश नहीं दे सकती।

 
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जल्लीकट्टू पर एक सप्ताह तक फैसला नहीं सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

जल्लीकट्टू - फोटो : self
सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू के मुद्दे पर एक सप्ताह तक फैसला नहीं सुनाने का केंद्र का आग्रह शुक्रवार को मान लिया। केंद्र ने न्यायालय को बताया कि इस मुद्दे के समाधान को लेकर वह तमिलनाडु के साथ बातचीत कर रहा है। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ को बताया कि जल्लीकट्टू से तमिलनाडु के लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं और केंद्र तथा राज्य सरकार इस मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

विरोध स्वरूप लेखक ने पुरस्कार लौटाया
जल्लीकट्टू के मुद्दे पर केंद्र की तरफ से सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने के विरोध स्वरूप साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित एक लेखक ने शुक्रवार को अपना पुरस्कार लौटा दिया। लक्ष्मी श्रवणकुमार को पिछले साल बाघ के शिकार पर उनके उपन्यास ‘कानाकन’ के लिए साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने जल्लीकट्टू मामले में विरोध स्वरूप अपना पुरस्कार साहित्य अकादमी कार्यालय को लौटा दिया। 
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