अस्पतालों में इलाज पर कितना खर्च आएगा, इसकी जानकारी मरीजों और उनके परिजनों को आसानी से मिल सके, इसके लिए केंद्र सरकार ने अहम कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अस्पतालों और अन्य संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित कराने को कहा है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों को इलाज के खर्च के बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध कराना है।
अस्पतालों को स्पष्ट रूप से बतानी होंगी इलाज की दरें
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इस संबंध में जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मौजूदा नियमों के पालन की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि इलाज से जुड़ी फीस की जानकारी मरीजों और उनके परिजनों को आसानी से दिखाई दे।
मंत्रालय के अनुसार, अस्पतालों में सेवाओं और सुविधाओं की दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से मरीजों को इलाज पर होने वाले संभावित खर्च का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। इससे वे अपने बजट के अनुसार बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में देनी होगी जानकारी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (सेंट्रल गवर्नमेंट) रूल्स, 2012 का हवाला दिया है। इन प्रावधानों के तहत उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, जहां केंद्रीय कानून लागू है, संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को अपनी सेवाओं और सुविधाओं की दरें ऐसी जगह प्रदर्शित करनी होती हैं, जहां मरीज और उनके परिजन उन्हें आसानी से देख सकें। यह जानकारी अंग्रेजी के साथ स्थानीय भाषा में भी उपलब्ध होनी चाहिए।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय कानून लागू नहीं है, वहां स्वास्थ्य संस्थानों का नियमन संबंधित स्थानीय नियमों के तहत किया जाता है। इनमें से कई व्यवस्थाओं में भी सेवा शुल्क प्रदर्शित करने से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं।
बिलिंग विवाद कम करने में मिलेगी मदद
केंद्र सरकार का मानना है कि इलाज की दरों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने से अस्पतालों के बिल को लेकर होने वाली उलझन और विवाद कम हो सकते हैं। मरीजों को अलग-अलग सेवाओं के संभावित खर्च की जानकारी मिलने से वे इलाज के विकल्पों पर बेहतर तरीके से विचार कर सकेंगे। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है। ऐसे में संबंधित नियमों को लागू करने और उनका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों की है।
विदेशी मरीजों के लिए भी पैकेज की दरें दिखाने पर जोर
स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में इलाज कराने आने वाले विदेशी मरीजों के लिए भी पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि वे अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को मेडिकल या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी मरीजों के लिए उपलब्ध इलाज के पैकेज की दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करें।
मंत्रालय के अनुसार, इससे विदेश से आने वाले मरीजों को इलाज के विकल्प चुनने में आसानी होगी और कीमतों से जुड़ी शिकायतों में कमी आ सकती है। साथ ही, भारत को चिकित्सा और आयुष उपचार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।