केंद्र सरकार ने भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के प्रमुख और सदस्यों की सिफारिश करने के लिए 10 सदस्यीय सर्च समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख सामंत कुमार गोयल और सूचना आयुक्त हीरा लाल सामरिया भी इस समिति के सदस्यों में हैं।
लोकपाल अपने नियमित प्रमुख के बिना काम कर रहा था
यह पद पिछले साल 27 मई को न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो गया था। इसके बाद लोकपाल अपने नियमित प्रमुख के बिना काम कर रहा था। हालांकि लोकपाल के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती वर्तमान में लोकपाल कार्यवाहक अध्यक्ष हैं। फिलहाल लोकपाल में पांच सदस्य हैं। न्यायिक सदस्य के दो और गैर न्यायिक सदस्य का एक पद रिक्त है।
लोकपाल का एक अध्यक्ष होता है और इसमें आठ सदस्य हो सकते हैं जिसमें चार न्यायिक और बाकी गैर-न्यायिक। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली चयन समिति ने लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर विचार करने के लिए पैनल की सिफारिश करने के उद्देश्य से एक सर्च समिति का गठन किया है।
समिति में इसरो से लेकर एसबीआई के पूर्व उच्च अधिकारी शामिल
दो अगस्त के आदेश के अनुसार, सर्च समिति के नौ सदस्यों में उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कल्पेश सत्येन्द्र झावेरी, रॉ के पूर्व प्रमुख सामंत कुमार गोयल, पूर्व सूचना आयुक्त हीरा लाल सामरिया, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार, प्रसार भारती के पूर्व अध्यक्ष ए सूर्य प्रकाश और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की पूर्व प्रमुख अरुंधति भट्टाचार्य हैं। उनके अलावा, पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी ओटेम दाई और राजीव यादव और पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त अहमद जावेद को भी सर्च समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
2013 में आया लोकपाल
जानकारी के लिए बता दें कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम जो कुछ श्रेणियों के लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को देखने के लिए केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति की परिकल्पना करता है, इस अधिनियम को 2013 में पारित किया गया था। एक लोकपाल प्रमुख और उसके सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिशें प्राप्त करने के बाद की जाती है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष, निचले सदन में विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश या एक न्यायाधीश शामिल होते हैं।