गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, अब विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) की पूर्व अनुमति श्रेणी के तहत विदेश से चंदा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को इसे 4 वर्षों के भीतर खर्च करना होगा।
केंद्र सरकार ने सोमवार को संगठनों को विदेशों से मिलने वाले चंदे को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सोमवार को कहा कि विदेश से मिलने वाली चंदे की राशि को चार वर्षों के भीतर खर्च करनी होगी। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) की पूर्व अनुमति श्रेणी के तहत विदेश से चंदा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को इसे 4 वर्षों के भीतर खर्च करना होगा।
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मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया कि एफसीआरए के तहत पंजीकृत कोई भी व्यक्ति आवेदन करके पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद ही कोई विदेशी योगदान स्वीकार कर सकता है। ऐसी पूर्व अनुमति उन विशिष्ट गतिविधियों या परियोजनाओं के लिए वैध होगी, जिनके लिए इसे विशिष्ट स्रोत प्राप्त किया गया है।
केंद्र सरकार ने एफसीआरए की धारा 46 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए निर्देश दिया कि विदेश से चंदा हासिल करने और उसका उपयोग करने की वैधता अवधि पूर्व अनुमति के लिए आवेदन की मंजूरी की तारीख से क्रमशः तीन और चार वर्ष होगी।
गृह मंत्रालय ने एफसीआरए पंजीकृत एनजीओ की वैधता अवधि बढ़ाई
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इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) पंजीकृत उन गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की वैधता अवधि 30 जून तक बढ़ा दी थी। मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा था कि केंद्र सरकार ने जनहित में ऐसी संस्थाओं के एफसीआरए पंजीकरण प्रमाणपत्रों की वैधता 30 जून तक बढ़ाने का फैसला किया है जिनकी वैधता 31 मार्च तक बढ़ाई गई थी और जिनका नवीनीकरण आवेदन लंबित है।
उन एफसीआरए पंजीकृत संस्थाओं की वैधता भी बढ़ा दी जाएगी जिनकी पांच वर्ष की वैधता अवधि एक अप्रैल से 30 जून के बीच समाप्त हो रही है और जिन्होंने पांच वर्ष की वैधता अवधि समाप्त होने से पहले नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है या करेंगे।