केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि हेल्थ केयर वर्कर्स (एचसीडब्ल्यू) और फ्रंट लाइन वर्कर्स (एफएलडब्ल्यू) के लिए ऑन-साइट पंजीकरण अब केवल सरकारी कोरोनावायरस टीकाकरण केंद्रों में किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि इन कोरोना योद्धाओं को अपना मूल फोटो पहचान पत्र और रोजगार प्रमाण पत्र साथ लाना होगा।
बता दें, यह फैसला कुछ कोविड-19 वैक्सीन केंद्रों में एचसीडब्ल्यू और एफएलडब्ल्यू के नाम पर अयोग्य लाभार्थियों का टीकाकरण किए जाने की बात सामने आने के बाद लिया गया है। दरअसल, कुछ केंद्रों पर 45 साल से कम उम्र के लोगों का स्वास्थ्यकर्मी या फ्रंटलाइन वर्कर्स के नाम पर रजिस्ट्रेशन कर टीका लगाने की बात सामने आ रही है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कोरोना टीकाकरण के प्रोटोकॉल के उल्लंघन का मामला सामने आया है। इस गड़बड़ी को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली के प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है,जिसमें इस विषय पर ध्यान देने और अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मागने का आदेश दिया गया है।
पत्र के जरिेये कहा गया है कि निजी वैक्सीन सेंटर के रूप में काम कर रहे नेहरू नगर के विद्यासागर इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ, न्यूरो एंड अलाइड साइंसेज में टीका के लिए लाभार्थियों के पंजीकरण में गड़बड़ी की गई है। यहां 45 साल से कम उम्र के लोगों को स्वास्थ्य व अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मचारी के रूप में पंजीकृत कर उनका टीकाकरण किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली सरकार को आदेश देकर इस अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा है।
पत्र में यह भी कहा गया, '19 मार्च से तीन अप्रैल के बीच के को-विन के डाटा से यह सामने आया है कि टीका लगवाने वाले कई लोग तय प्राथमिकता समूहों से बाहर हैं।' भूषण ने पत्र में कहा कि नियोक्ता यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे कि रोजगार प्रमाणपत्र केवल पात्र एचसीडब्ल्यू / एफएलडब्ल्यू को जारी किया जाए। नियोक्ता और संबंधित एचसीडब्ल्यू / एफएलडब्ल्यू रोजगार प्रमाण पत्र में दी गई जानकारी की सत्यता के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।