पीठ ने कहा कि दो अन्य याचिका, जिनमें पर्यावरण मंजूरी के मुद्दे उठाए गए हैं और पर्यावरण मंजूरी पर नई याचिका शीर्ष अदालत के आदेशों से शासित होगी। राजीव सूरी की ओर से अधिवक्ता शिखिल सूरी ने कहा कि एक लंबित याचिका में सिर्फ संसद परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी को चुनौती दी गयी है लेकिन अब पूरी सेंट्रल विस्टा परियोजना को पर्यावरण मंजूरी का मुद्दा उठाया गया है।
केंद्र की ओर से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह हमारे बनाम उनके का मामला नहीं है। हमारी संसद का निर्माण हो रहा है। भविष्य में रक्षा और वित्त मंत्रालय के भवनों का भी निर्माण किया जाएगा। न्यायालय के समक्ष ‘निजी व्यक्ति’ और ‘जनभावना वाले लोग’ आए हैं।’
दीवान ने कहा कि इस परियोजना को प्रत्येक स्तर पर उस जांच से गुजरना होगा जिसे एक नागरिक उठा सकता है। संसद की नयी इमारत के निर्माण और मौजूदा इमारत के नवीनीकरण के लिये मंजूरी दी गयी है।
परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दिये जाने का विरोध करते हुये दीवान ने कहा कि इसमें टुकड़े टुकड़े की नीति अपनाई गयी है जबकि पूरी सेन्ट्रल विस्टा परियोजना को ही नये नगरीय परियोजना के रूप में पंजीकृत करने की आवश्यकता थी और इसके बाद ही पर्यावरण मंजूरी दी जानी चाहिए थी। हाल ही में सीपीडब्लूडी ने इस परियोजना का समर्थन करते हुये इसे चुनौती देने वाली याचिकायें खारिज करने का अनुरोध किया था।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा था कि सेन्ट्रल विस्टा परियोजना के लिये प्राधिकारियों द्वारा वस्तुस्थिति में किसी भी प्रकार का बदलाव वे अपने जोखिम पर करेंगे। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि यह परियोजना, जिसमे नया संसद भवन औरकई सरकारी इमारतें शामिल हैं, उसके फैसले के दायरे आयेंगी।
इन याचिकाओं में सेंट्रल विस्टा कमेटी द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र दिये जाने और संसद भवन की नयी इमारत के निर्माण के लिये पर्यावरण मंजूरी को भी चुनौती दी गयी है।