चूंकि किसी क्षेत्र के लिए अलग से कोई विशेष बटालियन नहीं होती। किसी भी मौजूदा बटालियन से ही जवानों को दूसरी जगह पर ड्यूटी के लिए भेजा सकता है। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। दिल्ली में अर्धसैनिक बलों की कई बटालियन तैनात हैं। कई जगहों पर फेमिली क्वार्टर भी हैं।
एकाएक जवानों को कश्मीर या दूसरी जगह पर भेज दिया जाता है। जवानों को बिना किसी देरी के नई ड्यूटी ज्वाइन करनी पड़ती है। ऐसे में उनके परिवार वहीं पर छूट जाते हैं। बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, इसलिए सत्र पूरा होने से पहले क्वार्टर भी खाली नहीं कराया जाता।
पहले यह होता था कि जवान को कुछ समय के लिए क्वार्टर तो मिल जाता था, लेकिन वहां का एचआरए बंद कर दिया जाता था। इसके पीछे की वजह जवान को नई पोस्टिंग मिलना होती थी, ऐसे में जवान को नई तैनाती वाली जगह के हिसाब से एचआरए मिलता था।
बहुत सी जगहों पर एचआरए की दरें अलग-अलग होती हैं। जैसे कश्मीर और दिल्ली के एचआरए में अच्छा खासा अंतर होता है। किसी भी शहर के मुकाबले दिल्ली में एचआरए ज्यादा रहता है। कश्मीर में देखें तो एचआरए बहुत ही कम हो जाता है। इसके चलते जवानों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
गृह मंत्रालय ने जवानों की इस दिक्कत को खत्म करने के लिए अब यह प्रावधान कर दिया है कि कश्मीर घाटी में तैनात जवानों को उनके मूल वेतन का 16 फीसदी अतिरिक्त एचआरए मिलेगा। साथ ही उन्हें वहां सामान्य तौर पर मिलने वाला एचआरए पहले की भांति जारी रहेगा। यानी उन्हें डबल एचआरए का लाभ मिलेगा।