देश 15 अगस्त को 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियों में जुटा है। इस बीच आजादी के 73 साल बाद भी कई संगठन जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बल और सिविल महकमे अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए 14 अगस्त को ये संगठन एक अलग तरह का अभियान शुरू करेंगे।
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन आजादी की पूर्व संध्या पर पुरानी पेंशन बहाल करने और एसएससी जीडी-2018 के 60 हजार उम्मीदवारों के नियुक्ति पत्र जल्द जारी कराने के लिए ट्विटर पर अभियान शुरू करेंगे। इनकी मांग है कि प्रधानमंत्री मोदी लालकिले की प्राचीर से अर्धसैनिक बलों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की घोषणा करें।
दूसरी ओर इंडियन पब्लिक सर्विस फेडरेशन ने सुनिश्चित पेंशन, स्कीम/कांट्रैक्ट/आउट्सोर्स/संविदा कर्मचारीयों को रेगुलर करने, देश मे एक जैसे वेतनमान की मांग पर राष्ट्रीय वेतन आयोग गठित करने, स्वास्थ्य सेवाएं, पानी, बिजली, टेलीफोन और रेलवे समेत कई दूसरे विभागों को निजी हाथों मे देना का प्रयास, ऐसी मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं। यह फेडरेशन 14 अगस्त को अधिकार दिवस के रूप में मनाएगा।
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के मुताबिक 14 अगस्त को 12 लाख केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी) पुरानी पेंशन बहाली के लिए ट्विटर पर अभियान शुरू करेंगे। इस अभियान में 2018 के दौरान विभिन्न बलों में चयनित हो चुके आवेदकों को ज्वाइनिंग लैटर जारी कराने की मांग रखी जाएगी।
करीब 60 हजार उम्मीदवार दो साल से नियुक्ति पत्र जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री मोदी से मांग की है कि वे स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर लालकिले की प्राचीर से सरहदों के चौकीदारों को पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाली का तोहफा प्रदान करने की घोषणा करें। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ने देश की सीमा एवं आतंरिक सुरक्षा को मजबूत करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है।
इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव प्रेमचंद के मुताबिक, 14 अगस्त 2020 को देशभर के कर्मचारी अधिकार दिवस के रूप में मनाएंगे। कर्मचारी एसोसिएशन पब्लिक हेल्थ, पब्लिक एजुकेशन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पब्लिक कम्युनिकेशन सिस्टम, पब्लिक वाटर सप्लाई, इलेक्ट्रिक सप्लाई, पब्लिक फूड डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम जैसे बुनियादी मुद्दों को अधिकार मानते हैं।
सरकार द्वारा महंगाई पर रोकथाम लगाने की जगह महंगाई भत्ते को रोकना हमारे अधिकारों के खिलाफ है। आजादी के 73 साल बाद भी आज तक सरकारी कर्मचारी दूसरे दर्जे के नागरिक बने हुए हैं। सरकारी कर्मचारियों को ट्रेड यूनियन एवं राजनीतिक अधिकारों से वंचित क्यों रखा हुआ है।
इसका कारण सरकार की सरकार की बहुत सी गलत नीतियां हैं। नतीजा, कर्मचारी अपना मुंह नहीं खोल पाते। सरकारी विभागों का निजीकरण किया जा रहा है। 14 अगस्त 2020 को आजादी की पूर्व संध्या पर देशभर के कर्मचारी, सरकारी तंत्र को बढ़ाने व सविधान में मिले अधिकार देने मांग करेंगे।