जातिगत आरक्षण को लेकर कितनी भी राजनीति कर ली जाए लेकिन जिन्हें इसका फायदा मिलना चाहिए वह उनतक नहीं पहुंच पा रहा है। एक आयोग की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें पता चला है कि ओबीसी आरक्षण व्यवस्था में कुछ जातियां ही आरक्षण का पूरा लाभ लेने में सफल रही हैं।
कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त पिछड़ा वर्ग में जिन जातियों को सबसे ज्यादा आरक्षण का लाभ मिला है, उनमें यादव, कुर्मी, जाट (राजस्थान का जाट समुदाय सिर्फ भरतपुर और धौलपुर जिले के जाट समुदाय को ही केन्द्रीय ओबीसी लिस्ट में जगह दी गई है), सैनी, थेवार, एझावा और वोक्कालिगा जैसी जातियां शामिल हैं।
जातिगत आरक्षण पर आधारित यह रिपोर्ट कमिशन ऑफ एक्जामिन सब कैटेगोराइजेशन ऑफ ओबीसी ने तैयार की है। इस कमीशन का गठन अक्तूबर, 2017 में किया गया था। बीते हफ्ते ही इस कमीशन का कार्यकाल 31 मई, 2019 तक के लिए बढ़ाया गया है।
आयोग ने मौजूदा रिपोर्ट तैयार करने करने के लिए पिछले पांच सालों में करीब 1.3 लाख केन्द्रीय नौकरियां जो कि ओबीसी कोटा के तहत दी गई हैं का अध्ययन किया है। इसके साथ ही आयोग ने सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थानों में हुए एडमिशन का भी अध्ययन किया।
आंकड़े से यह भी पता चला है कि कई राज्यों ओबीसी कोटा जनसंख्या के हिसाब से अधिक कोटा दिया गया है। वहीं कई राज्यों में जनसंख्या के आधार पर कोटा का लाभ जरुरी लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। रिपोर्ट में पता चला है कि ओबीसी की 983 जातियों का जहां आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिला है, शिक्षा और जॉब के आधार पर 994 जातियों में से सिर्फ 2.68% ही आरक्षण का लाभ ले पा रही हैं।
कमीशन के लिए यह रिपोर्ट तैयार करने का काम दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी ने किया है। फिलहाल यह रिपोर्ट आयोग ने देश के सभी मुख्य सचिवालयों और राज्य के पिछड़ा वर्ग आयोग को भेज दी गई है।