दरअसल सीआईसी रेल मंत्रालय की तरफ से हिंदी की आरटीआई का जवाब अंग्रेजी में दिए जाने से नाराज थे। सीआईसी ने मंत्रालय के अधिकारियों को सूचना रोकने का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि हिंदी के आवेदन का जवाब अंग्रेजी में और विस्तार के बजाय संक्षेप में देना सूचना मुहैया नहीं कराने जैसा है। आयोग ने रेलवे के सीपीआई और सचिव को सांसद राजेश कुमार दिवाकर के एमपीलैड से जुड़ी सूचना एकत्र करने और तीस दिन के भीतर मुहैया कराने को कहा है।
धारा-4 के तहत राज्य सरकार भी बाध्य
सीआईसी ने कहा है कि राज्य सरकार और उनके प्राधिकरण राज्य सूचना आयोग के तहत आते हैं। सीआईसी उन्हें निर्देश नहीं दे सकता, लेकिन एमपीलैड का कोष केंद्र सरकार जारी करती है। इसके चलते इससे जुड़ी सूचना राज्य सरकार व प्राधिकरणों को आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के तहत देनी ही होगी। साथ ही सांख्यिकी मंत्रालय से जुडे़ सभी जिला प्राधिकार भी एमपीलैड से जुड़ी सूचना के प्रति जवाबदेह हैं।