केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने फैसला सुनाया कि वकील अपने मुवक्किलों के मामलों के बारे में जानकारी पाने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून का इस्तेमाल नहीं कर सकते। आयोग ने कहा कि इस तरह से पारदर्शिता कानून का इस्तेमाल करने से इसके उसके मुख्य मकसद पूरे नहीं होते।
मुवक्किल की ओर से आरटीआई मांगने पर आपत्ति
हरियाणा के एक जवाहर नवोदय विद्यालय में फल-सब्जी आपूर्ति करार समाप्त होने से जुड़े विवाद में दायर दूसरी अपील को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने खारिज कर दिया। सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने कहा कि अपीलकर्ता वकील ने अपने भाई जो संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण को फल-सब्जी की आपूर्ति करता था। आयोग ने कहा किया कि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आपूर्तिकर्ता स्वयं आरटीआई आवेदन क्यों नहीं कर सकता, जिससे यह प्रतीत होता है कि वकील ने अपने मुवक्किल की ओर से जानकारी मांगी, जो आरटीआई अधिनियम के तहत स्वीकार्य नहीं है।
आरटीआई का दुरुपयोग नहीं हो सकता
मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए सीआईसी ने इस बात पर जोर दिया कि एक वकील अपने मुवक्किल की ओर से दायर किए गए मामलों से संबंधित जानकारी नहीं मांग सकता। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हर प्रैक्टिस करने वाला वकील अपने मुवक्किल की तरफ से जानकारी पाने के लिए आरटीआई कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल करेगा, जो आरटीआई कानून की योजना के मकसद को पूरा नहीं करता।
आयोग ने फैसले का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि आरटीआई कानून के सराहनीय उद्देश्यों का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं किया जा सकता और यह वकील के हाथ में ऐसा हथियार नहीं बनना चाहिए जिसका इस्तेमाल वह अपनी प्रैक्टिस को बढ़ावा देने के लिए हर तरह की जानकारी हासिल करने के लिए करे। सार्वजनिक प्राधिकरण के इस दावे पर ध्यान देते हुए कि आग में कई रिकॉर्ड नष्ट हो गए थे और निजी जानकारी को छूट के तहत सही तरीके से देने से मना किया गया था, आयोग ने कहा कि उसे सीपीआईओ के दिए गए जवाब में कोई कमी नहीं मिली। इसलिए अपील का निपटारा कर दिया गया और लिखित प्रविष्टियों की प्रति अपीलकर्ता के साथ शेयर करने का निर्देश दिया गया।
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मुख्य बातें:
- वकील द्वारा मुवक्किल/परिजन की ओर से आरटीआई आवेदन को अस्वीकार्य माना गया।
- मद्रास हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर वकीलों की ऐसी आरटीआई मांगों पर रोक दोहराई गई।
- आरटीआई को मुकदमेबाजी में साक्ष्य जुटाने का साधन नहीं बनाया जा सकता।
- आग में रिकॉर्ड नष्ट होने और निजी जानकारी पर छूट के दावे को आयोग ने स्वीकार किया।