एक माह में स्टाफ कार के लिए ढाई सौ लीटर तेल मिलेगा। अगर इससे ज्यादा तेल लगता है तो उसके लिए फाइनेंसियल एडवाइजर की सहमति से प्रशासनिक सचिव की मंजूरी लेनी होगी। भविष्य में सरकारी विभाग जब कभी किराए पर गाड़ी लें तो उसमें इलेक्ट्रॉनिक वाहन को वरियता दें।
अब छह लाख रुपये तक की गाड़ी खरीद सकेंगे अफसर
बता दें कि भारत सरकार में संयुक्त सचिव एवं उससे ऊपर के अधिकारियों, विभाग के प्रमुख और वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड व उससे अधिक वेतन वाले रैंक में शामिल अफसरों को स्टाफ कार की सुविधा मिलती है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने केंद्र सरकार के दफ्तरों में स्टाफ कार की खरीद और उसके संचालन के नियमों में बदलाव किया है। स्टाफ कार खरीदने की सीमा अब बढ़ा दी गई है। पहले यह सीमा पौने पांच लाख रुपये थी, अब इसे छह लाख रुपये कर दिया है।
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि 'सरकारी ई-मार्केट प्लेस' जीईएम पर उपलब्ध छह लाख रुपये की नेट डीलर कीमत वाली कारों को बतौर स्टाफ कार के तौर पर खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यहां पर नेट डीलर प्राइस का मतलब उस दाम से है, जिस पर कोई कंपनी अपने डीलर को वह गाड़ी मुहैया कराती है।
इस स्तर पर लिया जाएगा 'स्टाफ कार' खरीदने का निर्णय
स्टाफ कार खरीदने का निर्णय वित्तीय सलाहकार के परामर्श से मंत्रालय/विभाग के प्रशासनिक सचिव के स्तर पर लिया जाएगा। सभी मंत्रालयों/विभागों में इस बात का ध्यान रखा जाए कि जब भी वे दफ्तर के लिए ठेकेदार के माध्यम से किराए पर पेट्रोल या डीजल की कार लेते हैं तो उसमें इलेक्ट्रिक कारों को प्राथमिकता दें। जहां पर पेट्रोल/डीजल वाहनों को किराए पर लेने के लिए मौजूदा अनुबंध समाप्त हो गया और नया अनुबंध करना है तो मंत्रालय/विभाग, इलेक्ट्रिक वाहनों को किराए पर लेने के लिए अनुबंध पर विचार कर सकते हैं। स्टाफ कारों का उपयोग, प्रामाणिक आधिकारिक उद्देश्य के लिए ही किया जाएगा। वास्तविक आधिकारिक उद्देश्य, केंद्र सरकार के विभाग द्वारा निर्धारित होगा। सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना, मुख्यालय के बाहर आधिकारिक यात्रा के लिए स्टाफ कारों का उपयोग नहीं किया जाएगा। ड्यूटी यात्रा को गैर-ड्यूटी यात्राओं पर वरीयता दें। केंद्र सरकार के अधिकारी अपने निपटान में सरकारी उपक्रमों या अर्ध सरकारी/स्वायत्त संगठनों/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से संबंधित स्टाफ कारों को दौरे पर छोड़कर नहीं रखेंगे।
इन अधिकारियों के हाथ में रहेगा 'स्टाफ' कारों का नियंत्रण
स्टाफ कार, अवर सचिव के पद से नीचे के प्रशासनिक अधिकारी के नियंत्रण में नहीं होगी। इस रैंक से बड़े अधिकारी के पास ही कार का नियंत्रण रहेगा। नियंत्रण अधिकारी, कार के उचित उपयोग, उसकी देखभाल व रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा। नियंत्रण अधिकारी एक लॉग बुक मेनटेन रखेगा। उसमें मरम्मत और प्रतिस्थापन का रिकॉर्ड रहेगा। कौन सा स्पेयर पार्ट्स डला है और पेट्रोल डीजल की लागत, ये सब लॉग बुक में रजिस्टर होगा। स्टाफ कार के हकदार अधिकारियों द्वारा सीमित गैर-आधिकारिक उद्देश्य के लिए स्टाफ कार के उपयोग की अनुमति, रुपये के भुगतान पर 500 किलोमीटर तक है। एक महीने में 500 किमी से अधिक के उपयोग के लिए, 24 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से अतिरिक्त किलोमीटर का खर्च देय होगा। आदेशों में स्टाफ कारों की रनिंग कॉस्ट पर होने वाले खर्च को कम रखने पर बल दिया गया है। प्रत्येक स्टाफ कार के लिए ईंधन की खपत की सीमा 250 लीटर प्रति माह निर्धारित की गई है। निर्धारित सीमा से अधिक का भुगतान प्रशासनिक सचिव के अनुमोदन एवं वित्तीय सलाहकार की सहमति से ही किया जायेगा। यात्रा पूरी होने पर किलोमीटर का सत्यापन होगा।
कर्मियों के निजी वाहनों पर 'भारत सरकार' नहीं लिखेंगे
सरकारी कर्मचारियों के स्वामित्व वाले निजी वाहनों पर 'भारत सरकार' का उल्लेख करने की अनुमति नहीं मिलेगी। अगर विभाग द्वारा किराए पर स्टाफ कार ली गई तो उसके आगे और पीछे स्टिकर लगा सकते हैं। उससे यह मालूम होगा कि वे कार किसी मंत्रालय या विभाग की है। मंत्रालय/विभाग 2019 में संशोधित मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में निहित प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली स्टाफ कारों सहित मोटर वाहनों से जुड़े सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजे का भुगतान कर सकते हैं। मुआवजे का भुगतान तथापि, ऐसे मामले में सरकार को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से नहीं रोकेंगे, जिसमें सरकारी वाहन चालक के खिलाफ, नुकसान की वसूली भी शामिल है, यदि आवश्यक समझा जाए तो। दुर्घटना के परिणामस्वरूप इस तरह के भुगतान और आपराधिक दायित्व से चालक को छूट नहीं मिलेगी।