भारतीय सिविल सेवा को भारत सरकार और देश की प्रशासनिक मशीनरी की रीढ़ माना जाता है। सरकार में नाम तो नेताओं का होता है लेकिन योजनाओं के पीछे एक प्रशासनिकअधिकारी ही होता है। वहीं इन सिविल सेवकों पर कार्रवाई से जुड़े आंकड़े सरकार ने संसद में पेश किए। सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को सूचित किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पांच साल से अधिक समय में 216 सिविल सेवकों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं।
सरकार ने कार्रवाई का राज्यवार ब्यौरा दिया और बताया कि 39 सिविल सेवक महाराष्ट्र, 22 जम्मू-कश्मीर, 21 दिल्ली, 17 उत्तर प्रदेश और 14 कर्नाटक के थे जिन पर मामले दर्ज किए गए हैं। एक लिखित उत्तर में केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों यानी 2018, 2019, 2020, 2021, 2022 और 2023 (30.06.2023 तक) के दौरान, सीबीआई ने 216 सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं।
उन्होंने आगे बताया कि मामलों का सामना कर रहे कुल सिविल सेवकों में से 12 बिहार से, 11 तमिलनाडु से, नौ-नौ गुजरात, हरियाणा और केरल से और आठ-आठ पंजाब, राजस्थान और तेलंगाना से थे। साथ ही बोले कि अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968, और केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए आचार संहिता निर्धारित करते हैं, जिसका सेवा के प्रत्येक सदस्य को हर समय पालन करना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी, राष्ट्रीय आकांक्षाओं और निरंतर प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए उचित पाठ्यक्रमों के माध्यम से अधिकारी प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान करती है। इसमें अन्य बातों के साथ-साथ राष्ट्रवाद, नागरिक केंद्रितता और वित्तीय अखंडता की भावना को आत्मसात करना भी शामिल है।
एक अन्य जवाब में, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीबीआई ने 2018 से जून 2023 के दौरान विभिन्न सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ 135 मामले दर्ज किए हैं। उन्होंने कहा कि इन 135 मामलों में से 57 मामलों में मुकदमे के लिए संबंधित अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। आगे कहा कि इन मामलों में से दो मामलों में अभियोजन की मंजूरी दो साल से अधिक समय से लंबित है।