केंद्र सरकार ने कालेधन को सफेद बनाने में जुटे तंत्र पर कड़ा प्रहार करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) व कॉस्ट अकाउंटेंट को मनी लॉन्ड्रिंग कानून के दायरे में ला दिया है।
केंद्र सरकार ने कालेधन को सफेद बनाने में जुटे तंत्र पर कड़ा प्रहार करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) व कॉस्ट अकाउंटेंट को मनी लॉन्ड्रिंग कानून के दायरे में ला दिया है।
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वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के तहत, इसमें मददगार फर्जी कंपनियां भी कानून के दायरे में होंगी। दरअसल इस प्रक्रिया में फर्जी कंपनियों का ही इस्तेमाल होता है। बुधवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक, धनशोधन का खेल रोकने के लिए ही मनी लॉन्ड्रिंग निषेध कानून, 2002 के दायरे में इन्हें लाया गया है। चार्टर्ड अकाउंटेंट के ग्राहक की ओर से किए अवैध वित्तीय लेनदेन को कानून की धारा 2 की उप-धारा (एक) के तहत माना जाएगा।
कंपनियों की खरीद-बिक्री भी दायरे में
अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री, प्रतिभूतियों या अन्य संपत्तियों का प्रबंधन, बैंक, बचत या प्रतिभूति खातों का प्रबंधन, कंपनियों के निर्माण, संचालन या प्रबंधन को कानून के दायरे में शामिल किया है। साथ ही, ट्रस्ट के गठन और कंपनियों की खरीद व बिक्री भी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के दायरे में आ गई है।