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संघ ने मोदी की कैशलेस अर्थव्यवस्था की सुरक्षा पर उठाए सवाल

Tue, 13 Dec 2016 02:32 AM IST
एम संजय/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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RSS - फोटो : File Photo
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पीएम मोदी की कैशलेस अर्थव्यवस्था की सुरक्षा को लेकर सरकार के अपने संगठनों की ओर से ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सबसे बड़ी समस्या पेमेंट मेकानिज्म की सुरक्षा को लेकर है। भारत में इनका अपना कोई सर्वर नहीं है, सारा डाटा विदेशी सर्वर में जाता है। इसलिए डाटा चोरी होने और निजता हनन की संभावना ज्यादा है। 
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संघ के मुखपत्र पांच्जन्य ने अपने कवर लेख के जरिए देश के साईबर जगत की स्थिति और उसके सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। तो अर्थिक क्षेत्र में कार्य करने वाली संघ की स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय मजदूर संघ सरीखे संगठनों ने भी कैशलेस अर्थव्यवस्था की खामियों की ओर इशारा किया है।

पांचजन्य के संपादक हितेष शंकर ने कहा इसे महज नोटबंदी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। अंतराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा बड़ी चुनौती बनी हुई है। आज के समय में स्मार्ट गजेट इस्तेमाल करते समय स्वत: रूप से कई अनचाहे एप डाउनलोड़ हो जाते हैं। यदि पर्याप्त समझदारी नहीं बरती जाती है तो उपभोक्ता को बड़ा नुकसान हो सकता है। जनता को जागरूक बनाने के साथ सेंधमारी की ओर निगाह रखनी जरूरी है।
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पांचजन्य ने अपने आवरण कथा में लिखा है सीमा पार आतंकी अड्डों और सीमा के भीतर कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राईक सरीखे कदमों के बाद भारत पर साइबर हमले का खतरा गहराता जा रहा है। राष्ट्र की सुरक्षा के साथ आम लोगों की निजता की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा है कि अब युद्ध सीमा पर नहीं बल्कि घरों के अंदर लड़े जा रहे हैं। जो कई बार हथियारबंद युद्धों से ज्यादा खतरनाक और नुकसान पहुंचाने वाले साबित होते हैं। 

जासूसी और साइबर हमले एक सिक्के के दो पहलू

आरएसएस - फोटो : self
जासूसी और साइबर हमले को एक सिक्के के दो पहलू बताते हुए संघ ने एनटीआरओ की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा है कि चीन हमारे प्रतिष्ठानों की सबसे ज्यादा जासूसी कराता है। पांचजन्य ने 2013 में असम में दंगों के दौरान बंगलौर में घटी घटना का जिक्र किया है जिसमें सोशल मीडिया की अफवाह के कारण पूर्वोत्तर के लोग बंगलुरू से भागने लगे थे। 

देश के साइबर जगत को असुरक्षित करार देते हुए आगे लिखा है कि देश में जनता व्यापक पैमाने पर इंटरनेट का तो उपयोग करती है, लेकिन उसके खतरों के प्रति सचेत नहीं है। सरकार से साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की मांग की गई है। सोशल मीडिया को असुरक्षित बताते हुए कहा गया है कि आपकी हर बात सब तक है। तो गुगल सरीखे सर्च इंजन को भी असुरक्षित बताया है।
 
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक अश्विनी महाजन ने कैशलेस अर्थव्यवस्था और उसकी सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर अमर उजाला से बातचीत में कहा कि विदेशी सर्वर पर आधारित पेमेंट मेकानिज्म सुरक्षित नहीं हैं। वर्तमान में देश में व्याप्त सभी पेमेंट मेकानिज्म की स्टडी कर रहे हैं। जनता को जागरूक करने के साथ उनकी कमियों को दूर करने के लिए सरकार से भी बात करेंगे। 
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भारतीय मजदूर संघ ने कैशलेस अर्थव्यवस्था के कदम पर अविश्वास जताया है

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने कैशलेस अर्थव्यवस्था के कदम पर अविश्वास जताया है। बीएमएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष वैद्यनाथ राय ने कहा कि समाज को अभी तुरंत कैशलेस बनाना संभव नहीं है। मध्यम और उच्च वर्ग तो कैशलेस अर्थव्यवस्था को अपना लेगा मगर गरीब और बीपीएल श्रेणी का तबका इसे नहीं अपना सकता है। इसके लिए तमाम बुनियादी ढ़ाचा खड़ा करना होगा। 

उन्होंने कहा कि सरकार नोटबंदी से होने वाली दिक्कतों का अंदाजा लगाने में ही विफल रही है। कदम उठाने से पहले सरकार को देश में बैंकों की संख्या बढ़ानी चाहिए थी, नकदी की मुकम्मल व्यवस्था के लिए भरपूर संख्या में नोट छाप लेने चाहिए थे और बैंकों में लोगों के खातों की संख्या बढ़ानी चाहिए थी। 

दरअसल संघ के अधिकारियों का भी कहना है कि कैशलेस की ओर बढ़ने से पहले अपने सर्वर का निर्माण करना चाहिए था। अपनी तकनीक विकसित करनी चाहिए थी ताकि डाटा की साझेदारी कहीं बाहर न हो। उक्त अधिकारी का कहना है कि आधार को अमल में लाने से पहले सरकार ने कानून बनाकर यह तय किया कि इसका डाटा शेयर नहीं होगा। जरूरी होने पर संबंधित मंत्रालय को ही दिया जाएगा। जबकि पेमेंट मेकानिज्म के साथ अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। 

कैशलेस के अहम खतरें- सभी बैंक लोगों का नीजि डाटा बेंच देते हैं, केंडिट और डेबिट कार्ड की नीजि जानकारियां यदि दूसरे बैंकों के हाथ लग जाएं तो इससे होने वाले नुकसान का दायित्व तय नहीं। अपना सर्वर न होने की वजह से डाटा सुरक्षित नहीं, पेमेंट मेकानिज्म में जुटी अधिकांश कंपनियों में विदेशियों की हिस्सेदारी ज्यादा। 
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