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केंद्र सरकार के ये कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था में होंगे शामिल, एनपीएस को कहेंगे अलविदा

Sat, 18 Jul 2020 09:12 PM IST
आसिम खान जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
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केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत अनेक कर्मचारी अब 'एनपीएस' यानी नेशनल पेंशन स्कीम को अलविदा कह कर पुरानी पेंशन व्यवस्था में शामिल होंगे। केंद्र सरकार ने गत फरवरी में इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए योग्य कर्मियों से आवेदन मांगे थे। इसके बाद जब अनेक मंत्रालयों और विभागों ने अपने आवेदन जमा कराए तो उसमें कई तरह के सवाल खड़े हो गए। अभी तक जितने भी मुद्दे उठे हैं, सरकार ने उन सभी को लेकर स्पष्टीकरण दे दिया है।

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इस योजना में वे कर्मचारी शामिल हो सकते हैं, जिनकी भर्ती प्रक्रिया एक जनवरी 2004 से पहले पूरी हो गई थी, लेकिन किसी कारणवश वे उक्त तिथि पर या उससे पहले ड्यूटी ज्वाइन नहीं कर पाए। उनमें से बहुत से कर्मियों की ये मांग रही है कि उन्हें पुरानी पेंशन व्यवस्था में शामिल किया जाए। केंद्र सरकार ने अब ऐसे सभी कर्मियों को एनपीएस से बाहर निकलकर पुरानी पेंशन व्यवस्था यानी सेंट्रल सिविल सर्विस (पेंशन) नियम, 1972 के दायरे में आने का अवसर दे दिया है।

बता दें कि केंद्र सरकार के अनेक विभागों में ऐसे कर्मी रहे हैं जो किन्ही कारणों से पुरानी पेंशन व्यवस्था से बाहर हो गए थे। दरअसल, सरकार के नियमानुसार, जो भी कर्मी एक जनवरी 2004 के बाद किसी विभाग में नियुक्त हुआ है, उसे नेशनल पेंशन स्कीम में शामिल किया गया है। इस तिथि से पहले जितने भी कर्मी या अधिकारी सरकारी सेवा में आए हैं, उन सभी को पुरानी पेंशन व्यवस्था के फायदे मिलते हैं। सरकारी कर्मचारी एनपीएस में आने से खुश नहीं हैं, आर्थिक फायदे के लिहाज से उन्हें पुरानी पेंशन व्यवस्था बेहतर लगती है।
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इस मांग को लेकर अनेक कर्मचारी एसोसिएशन आए दिन सरकार को ज्ञापन देती रहती हैं। कुछ कर्मियों ने इस मामले को अदालत में भी चुनौती दी थी। केंद्र सरकार ने इस साल के शुरू में यह तय किया है कि ऐसे कर्मचारी जिनकी ज्वाइनिंग किसी कारणवश एक जनवरी 2004 को या उसके बाद हुई है, मगर उनकी भर्ती प्रक्रिया इस तारीख से पहले ही पूरी हो चुकी थी, वे पुरानी पेंशन व्यवस्था में शामिल होने के लिए आवेदन दे सकते हैं। केंद्रीय कर्मियों को 31 मई 2020 तक अपना आवेदन दे दिया था।
 संबंधित विभागों ने जब इन आवेदनों की जांच की तो कई सवाल खड़े हो गए।

कर्मियों ने कई मुद्दों पर विभाग से सवाल पूछा था। जैसे कर्मियों ने पूछा कि उन्होंने एक जनवरी 2004 के बाद नौकरी ज्वाइन की थी, लेकिन उनकी भर्ती से संबंधित प्रक्रिया इस तारीख से पहले पूरी हो चुकी थी। बाद में उन्होंने ज्वाइनिंग के कुछ समय बाद सरकारी नियमों का पालन करते हुए दूसरा विभाग ज्वाइन कर लिया। इसका मतलब है कि कर्मियों ने अपने विभाग की इजाजत लेकर नई नौकरी ज्वाइन की थी। अब उन्होंने पूछा है कि क्या अब उनके आवेदन पर विचार होगा। 

डीओपीटी की ओर से कहा गया है कि अगर उन्होंने नियमानुसार अपनी जॉब बदली है तो उनका आवेदन मान्य होगा। इस बाबत विभाग निर्णय लेगा कि उसका आवेदन आगे भेजा जाए या नहीं। हालांकि कमेटी उसके आवेदन पर विचार करेगी, बशर्ते वह सभी मापदंडों को पूरा करता हो। ऐसे मामलों में पुराने विभाग की पेंशन और ग्रेच्युटी आदि का क्या होगा, इस बाबत संबंधित विभाग की कमेटी दिशा निर्देश देगी। क्या मृत कर्मियों के परिजन का आवेदन आगे बढ़ाया जाएगा, यह सवाल भी आया है। ऐसे केस में भी कमेटी फैसला लेगी।

यदि किसी कर्मी को सहानुभूतिशील मामले के आधार पर नौकरी मिली है और उसने भी इस ड्राइव में आवेदन दिया है, ऐसे में विभाग क्या करेगा। इस तरह के मामले में भी वही मापदंड रहेंगे कि उसकी ज्वाइनिंग भले ही एक जनवरी 2004 के बाद हुई है, मगर उसके चयन से जुड़ी सारी औपचारिकताएं 31 दिसंबर 2003 को या उससे पहले पूरी कर ली गई थी। ऐसे मामले स्क्रीनिंग या सिलेक्शन कमेटी की सिफारिश पर आगे जाएंगे। सभी मंत्रालयों व विभागों से कहा गया है कि वे जल्द से जल्द ऐसे कन्टेंट सामने लाएं ताकि इस योजना को समय पर लागू किया जा सके।

साथ ही ऐसे केस कंट्रोलर ऑफ अकाउंट/पे एंड अकाउंट ओफिस या उनके नीचे के दूसरे कार्यालयों को भेजें। जिन कर्मियों के सभी दस्तावेज पूरे होंगे, उन्हें सेंट्रल सिविल सर्विस (पेंशन) नियम, 1972 के दायरे में लाया जाएगा।केंद्र सरकार 30 सितंबर 2020 तक इस बाबत फाइनल आदेश जारी करेगी। जो कर्मचारी एनपीएस से पुरानी पेंशन व्यवस्था में शामिल होंगे, उनका एनपीएस खाता 1 नवंबर 2020 से स्थायी तौर पर बंद कर दिया जाएगा।

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