केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 11 राज्यों से मिली अब तक की जानकारी के मुताबिक, दागी सांसद व विधायकों पर लंबित 1233 आपराधिक मामलों का मुकदमा विशेष अदालत में चल रहा है। इनमें से 136 मामलों का निपटारा किया जा चुका है जबकि 1097 मामले अभी भी लंबित हैं। सरकार ने पिछले महीने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है।
कानून मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में कहा गया है कि दागी सांसद व विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों केनिपटारे के लिए गठित 12 स्पेशल कोर्ट में से छह सत्र न्यायालय स्तर केजबकि पांच मजिस्ट्रेट स्तर की हैं। दिल्ली में दो स्पेशल कोर्ट जबकि उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगना, कर्नाटक, केरल, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में एक स्पेशल कोर्ट का गठन किया जाएगा।
मंत्रालय ने बताया कि बाकी राज्यों में जहां सांसद व विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या 65 से कम हैं, वहां नियमित कोर्ट में फास्टट्रेक केमाध्यम से मुकदमों का निपटारा किया जाएगा। इस संबंध में सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर दिया गया है। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पटना, कलकत्ता और केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि उनकेयहां और स्पेशल कोर्ट की दरकार नहीं है। वहीं बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि उनकेयहां और स्पेशल कोर्ट की जरुरत है। इलाहाबाद, मद्रास और हैदराबाद हाईकोर्ट ने इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं दी है। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार केविवेक पर छोड़ दिया है।
मंत्रालय ने कहा है कि अब तक की मिली जानकारी के मुताबिक, बिहार में सबसे अधिक 249 आपराधिक मामलों को स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर किया गया।
वास्तव में गत वर्ष एक नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और संबंधित अथॉरिटी को यह बताने के लिए कहा था कि दागी 1581 सांसद व विधायकों के मुकदमों का क्या हुआ।