नागरिकों की रजामंदी के बगैर निजी जानकारी के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने वाले निजी डाटा सुरक्षा विधेयक को केंद्र सरकार अगले साल बजट सत्र में पेश कर सकती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2019 को इस बिल को मंजूरी दे दी थी। इसमें नियम तोड़ने पर कंपनी के कार्यकारी अधिकारियों की तीन साल तक की जेल और 15 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
सूत्रों ने बताया कि विधेयक को लेकर बनी संयुक्त कमेटी का कार्यकाल सर्दियों के दो हफ्तों तक बढ़ाया गया है। जिसके बाद संसद के बजट सत्र में विधेयक को सदन में पेश किया जाएगा। बिल को इस साल फरवरी में लोकसभा में पेश किया गया था जहां से उसे संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेजा गया था। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी इस समिति की अध्यक्ष हैं।
इस बिल को सुप्रीम कोर्ट अगस्त 2017 में आए उस फैसले के बाद तैयार किया गया है जिसमें निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया। इसके बाद शीर्ष कोर्ट ने सितंबर 2018 के आधार से जुड़े एक फैसले में निजी डाटा सुरक्षा के लिए सख्त कानून की जरूरतों पर जोर दिया था। इस मामले में कोर्ट ने आधार को सांविधानिक मान्यता जरूर दी थी लेकिन आधार अधिनियम के कई प्रावधानों को खारिज कर दिया था।