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डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिकंजा: सख्त कानून बनाने पर मंथन, आईबी मंत्रालय मौजूदा प्रावधानों की कर रहा पड़ताल

Sun, 23 Feb 2025 04:08 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति को दिए जवाब में मंत्रालय ने कहा कि समाज में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अश्लील और हिंसक सामग्री दिखाने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सांविधानिक अधिकार का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्र सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नकेल कसने की तैयारी में है। इन प्लेटफॉर्म पर अश्लीलता और हिंसा परोसने की शिकायतों के मद्देनजर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सख्त वैज्ञानिक प्रावधानों की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके लिए हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनी प्रावधानों की पड़ताल की जा रही है।

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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसद की स्थायी समिति को दिए जवाब में मंत्रालय ने कहा कि समाज में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अश्लील और हिंसक सामग्री दिखाने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सांविधानिक अधिकार का दुरुपयोग किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा कानूनों में कुछ प्रावधान हैं, लेकिन ऐसी हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त और प्रभावी कानूनी ढांचे की मांग बढ़ रही है। मंत्रालय ने कहा कि उसने इन घटनाक्रमों पर गौर किया है। मौजूदा वैधानिक प्रावधानों और नए कानूनी ढांचे की आवश्यकता की जांच की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट और कई हाईकोर्ट, सांसदों और राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी वैधानिक संस्थाओं ने भी इस मुद्दे पर बात की है, जो रणवीर अल्लाहबादिया की हालिया अभद्र टिप्पणियों की व्यापक निंदा के बाद सुर्खियों में आया है। अल्लाहबादिया के खिलाफ कई जगह आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं और उसकी माफी से भी मामला शांत नहीं हुआ है।

विचार-विमर्श के बाद विस्तृत नोट
मंत्रालय ने समिति को बताया कि वह विचार-विमर्श के बाद एक विस्तृत नोट प्रस्तुत करेगा। 13 फरवरी को समिति ने मंत्रालय से पूछा था कि नई प्रौद्योगिकी और मीडिया प्लेटफार्मों पर विवादास्पद सामग्री पर अंकुश लगाने के लिए मौजूदा कानूनों में क्या संशोधन आवश्यक हैं।
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नियंत्रण के लिए अभी कोई विशिष्ट नियामक नहीं
पारंपरिक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर अश्लील और हानिकारक सामग्रियों को नियंत्रित करने के लिए विशिष्ट नियम हैं। लेकिन, इंटरनेट के दम पर संचालित ओटीटी प्लेटफॉर्म या यूट्यूब जैसे नए मीडिया के लिए कोई विशिष्ट नियामक ढांचा नहीं है, जिससे कानूनों में संशोधन की मांग उठ रही है। विशेष तौर पर अल्लाहबादिया जैसे प्रकरण के लगातार सामने आने से लोगों में आक्रोश है और सख्त कानूनी ढांचे की मांग बढ़ रही है।

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