सरकार जम्मू-कश्मीर की परिसीमन की योजना के तहत जम्मू और लद्दाख क्षेत्र मिलाकर विधानसभा की आठ नई सीटें जोडने पर विचार कर रही है। योजना सफल रही तो जम्मू और लद्दाख विधानसभा सीटें मिलाकर कश्मीर विधानसभा से तीन सीटें अधिक हो जाएंगी। फिलहाल राज्य के कश्मीर क्षेत्र में 46, जम्मू में 37 और लद्दाख क्षेत्र में 4 विधानसभा सीटें हैं।
सूत्रों के मुताबिक सरकार के सामने सबसे बड़ी अड़चन है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अबदुल्ला ने 2002 में राज्य के संविधान में आनन फानन में एक संशोधन किया था। इसके चलते 2026 तक राज्य का परिसीमन नहीं किया जा सकता।
दूसरी तरफ राज्य में 11 फीसदी जनजाति हैं जिनमें बकरवाल, गुजर और गडेडिय़ा शामिल हैं। केंद्र ने 1991 में इन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे दिया था। लेकिन इनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व नगण्य है। जबकि देश केबाकी हिस्से में अनुसूचित जनजातियों केलिए सीटें आरक्षित होती हैं।
एक मुद्दा यह भी है कि बंटवारे के बाद राज्य में बसे पश्चिम पाकिस्तान से आए लोगों को वोट का अधिकार नहीं दिया गया है। जबकि देश के दूसरे हिस्सों में बसे ऐसे लोगों को यह अधिकार प्राप्त है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में इनकी नागरिका पर भी लंबे समय से विवाद चल रहा है।