सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के लिए दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने शुक्रवार को नोटिस जारी कर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को चार हफ्ते का वक्त दिया है। इसके बाद मामले पर सुनवाई होगी।
सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि सरकार ने 2012 में इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाई थी ताकि वायु प्रदूषण पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही हाइब्रिड व इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को लेकर भी नीति बनी थी। याचिका में कहा गया है कि नीति तो बनी, मगर अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। इससे ग्लोबल वार्मिंग का स्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय ने 2015 में नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान, 2020 (एनईएमएमपी-2020) तैयार किया था। याचिका में एनईएमएमपी-2020 की सिफारिशों को लागू करेन के लिए केंद्र को निर्देश देने की अपील की गई है। साथ ही नीति आयोग की शून्य उत्सर्जन वाहन नीति ढांचा को अपनाए जाने की जरूरत पर बल दिया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि 2020 तक देश में तकरीबन 70 लाख हाइब्रिड वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा गया था, मगर अब तक सिर्फ 2.63 लाख इलेक्ट्रिक वाहन ही अपनाए जा सके हैं।