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कश्मीर से हट सकती है धारा 35ए, केंद्र सरकार के कदम से घाटी में बढ़ी हलचल

Sun, 24 Feb 2019 08:28 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी शनिवार का दिन अफवाहों, आशंकाओं और अफरातफरी से भरा रहा। इसकी वजह रहा केंद्र सरकार की तरफ से पाक समर्थित संगठन जमात-ए-इस्लामी पर कार्रवाई और पैरा मिलिट्री फोर्स के अचानक भारी जमावड़े के बीच कश्मीर घाटी में कयासों का दौर देखने को मिल रहा है। पुलिस अचानक हुई इस कार्रवाई का कोई विशिष्ट कारण बताने से बच रही है।

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हालांकि सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते धारा 35ए को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगी। पूरी घाटी इस अटकल से चिंतित है कि केंद्र एक अध्यादेश के जरिए इस धारा को निष्प्रभावी करने की तैयारी कर रही है। रविवार को घाटी में हुर्रियत कांफ्रेस के अलगाववादी नेताओं ने पूरी तरह से बंद की अपील की है। इसके मद्देनजर सुरक्षाबलों को अलर्ट किया गया है।

धारा 35ए जम्मू कश्मीर के बाहर रहने वाले लोगों को यहां अचल संपत्ति खरीदने, स्थायी तौर पर निवास करने और राज्य द्वारा प्रायोजित योजनाओं का लाभ उठाने से रोकती है। जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष यासीन मलिक को हिरासत में लेने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को सीआरपीएफ को आदेश देकर तत्काल 100 कंपनियों की तैनाती घाटी में करने के लिए कहा है। इन कंपनियों में सीआरपीएफ की 45, बीएसएफ की 35, एसएसी की 10 और आईटीबीपी की 10 कंपनियां शामिल हैं। इन्हें जम्मू में तत्काल प्रभाव से तैनात कर दिया गया है।
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अपने पत्र में सरकार ने हालांकि इस निर्णय के बारे में कोई विशेष कारण नहीं दिया है। जम्मू कश्मीर पुलिस के ऑर्डर में बहुत सी बीएफएस और आईटीबीपी की कंपनियों को सीआरपीएफ कंपनियों की पोस्टों की स्टैटिक गार्ड ड्यूटी लेने को कहा गया है। शुक्रवार की देर रात को पुलिस ने दर्जनों जमात नेताओं जिसमें उनके मुखिया डॉक्टर अब्दुल हामिद फयाज और दूसरे पदाधिकारी भी शामिल हैं उन्हें गिरफ्तार किया गया है। जमात नेताओं को घाटी के विभिन्न स्थानों से पकड़ा गया है। जिसमें अनंतनाग, पहलगाम, दियालगाम और दक्षिण कश्मीर का त्राल शामिल है।

शनिवार को स्थानीय नागरिकों और सुरक्षाबलों के बीच अनंतनाग और बांदीपोरा और श्रीनगर शहर के कुछ हिस्सों में झड़प हो गई थी। अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह जिलानी और मीरवाइज उमर फारूक ने मनमानी एकतरफा सामूहिक गिरफ्तारियों, रात में हुई छापेमारी, राज्य के कथित दबाव में लोगों में असुरक्षा की भावना, सेंसरशिप, जबरन नियंत्रण और धारा 35ए से किसी तरह की संभावित छेड़छाड़ के विरोध में रविवार को पूरी तरह से बंद बुलाया है। पुलिस ने इस बंद को रोकने के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों को एडवाइजरी जारी की है।

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