सार
अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के असर से निपटने के लिए सरकार ईसीएलजीएस योजना लाने की तैयारी में है। चमड़ा, कपड़ा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को राहत देने के उपायों पर मंगलवार को पीएम के प्रधान सचिव की उच्च स्तरीय बैठक होगी। निर्यातकों को तरलता संकट से उबारने के लिए क्लस्टर आधारित पूंजी निधि पर भी विचार।
ट्रंप टैरिफ के झटके से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े निर्यातकों को राहत देने के लिए सरकार आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) लागू करने की तैयारी में है। इस संबंध में मंगलवार को पीएम के प्रधान सचिव उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इसमें टैरिफ लागू होने से निर्यातकों पर पड़ने वाले असर की समीक्षा के साथ जवाबी कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा। खासतौर से भारी टैरिफ के प्रभाव में आने वाले चमड़ा, कपड़ा और इंजीनियरिंग सामान से जुड़े बड़े, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए राहत के उपाय किए जाएंगे।
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बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने बीते सप्ताह आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) में आर्थिक विशेषज्ञों व वरिष्ठ मंत्रियों के साथ स्थिति की खुद समीक्षा की थी। इस बैठक में अमेरिकी दबाव में नहीं झुकने, प्रभाव में आने वाले क्षेत्रों के लिए नया बाजार तलाशने और आर्थिक सुधारों की रफ्तार तेज करने पर सहमति बनी थी।
सरकारी सूत्र ने बताया कि निर्यातकों, प्रभावित उद्योगों के सुझावों पर गौर किया जा रहा है। हालात से निपटने, निर्यातकों और प्रभावित उद्योगों को सुरक्षा देने के लिए ईसीएलजीएस शुरू करने के साथ तरलता के दबाव को कम करने के लिए क्लस्टर आधारित कार्यशील पूंजी निधि देने पर विचार किया जा रहा है।
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ट्रंप के भावी रुख पर भी नजर
भारत की निगाहें ट्रंप के भावी रुख पर भी है। यूक्रेन-रूस के बीच युद्धविराम की संभावना तलाशने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात के बाद ट्रंप ने अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू करने के मामले में ढील देने के संकेत दिए थे। संभावना जताई जा रही है कि वह अतिरिक्त टैरिफ लागू करने की तारीख आगे भी बढ़ा सकते हैं।