निजी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को कोविड का टीका लगवाने का उत्साह दिखाया था, लेकिन पिछले कुछ महीने से कंपनियों ने खामोशी ओढ़ ली है। नेशनल कोविड टास्क फोर्स, टीकाकरण अभियान से जुड़े सदस्य ने अमर उजाला को बताया कि हमें निजी क्षेत्र से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अभी तक तो निराशा हाथ लगी है। सूत्र का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के टीके को भी भारत में इस्तेमाल की अनुमति दे दी गई है। निजी क्षेत्र को अब इस क्षेत्र में तेजी से आगे आना चाहिए। अपने कर्मचारियों को टीका लगवाने में तेजी दिखानी चाहिए।
नेशनल टास्क फोर्स, आईसीएमआर के चेयरमैन डॉ. एनके अरोड़ा ने भी कहा कि निजी क्षेत्र को टीकाकरण में खास रुचि दिखानी चाहिए। डॉ. अरोड़ा के मुताबिक जल्द ही केंद्र सरकार इसको लेकर निजी क्षेत्र से अपील कर सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि जल्द ही सरकार पत्र लिखकर टीकाकरण में आगे आने की अपील कर सकती है। बताते हैं निजी अस्पतालों को 25 प्रतिशत टीका का स्लॉट भी आरक्षित किया गया है और निजी क्षेत्र के अस्पतालों से टाइ-अप कर सकते हैं। नीति आयोग के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कारोबार को गति देनी है। व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी लाना है तो लोगों को इस दिशा में रुचि दिखानी चाहिए।
टीका है कहां जो रुचि लें?
टीका है कहां जो निजी क्षेत्र की कंपनियां रुचि लें, ताजा हालात को देखते हुए यह सवाल बार-बार उठ रहा है। इस पर फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काऊंसिल के चेयरमैन दिनेश दुआ कहते हैं कि अभी तो 45 साल से ऊपर वालों के लिए टीका नहीं है। 18 साल से ऊपर वालों को टीका लगवाने की घोषणा हुई। करोड़ों लोगों ने पंजीकरण कराया है, उन्हें टीका लगवाने की तारीख नहीं मिल पा रही है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के टीके को देर से मंजूरी मिली है, तो आखिर कैसे आनन-फानन में लोग टीका लगवा लें? दुआ मानते हैं कि इस मामले में बड़ी चूक हो चुकी है।