केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाहन ट्रैकिंग प्रणाली के लिए निगरानी केंद्र बनाने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार की तरफ से इस योजना को पूरा करने वाले राज्यों को निर्भया फंड से 332 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सार्वजनिक वाहनों में महिलाओं और बच्चों के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र ने यह कदम उठाया है।
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की तरफ से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन आयुक्तों और प्रधान सचिवों को पत्र लिखकर कहा गया कि वो फंड के लिए 15 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। राज्यों की ओर से वाहन ट्रैकिंग प्रणाली के लिए निगरानी की रफ्तार धीमी है। ऐसे में केंद्र की तरफ से निर्भया फंड से राज्यों को मदद देने का निर्णय लिया गया है, जिससे महिलाओं और बच्चों की यातायात को सुरक्षित बनाया जा सके। मंत्रालय ने एक अप्रैल 2018 के बाद सभी सार्वजनिक वाहनों में वाहन ट्रैकिंग उपकरण (वीएलटी) और आकस्मिक सूचना बटन लगाने का निर्देश दिया था।
इसकी पुनर्समीक्षा की गई और 31 दिसंबर, 2018 तक (पुराने वाहन) पंजीकृत सार्वजनिक परिवहन को इससे छूट दी गई। एक जनवरी, 2019 के बाद पंजीकृत सभी सार्वजनिक वाहनों में वीएलटी अनिवार्य है। हालांकि, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से इसमें मामूली प्रगति देखी गई है। इसके बाद सरकार ने इसे कई श्रेणियों में बांट दिया है।
परियोजना की लागत 463 करोड़ रुपये
अब इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार सामान्य भूभाग वाले राज्यों को 60 प्रतिशत जबकि दुर्गम भूभाग वाले राज्यों को 90 प्रतिशत सहायता उपलब्ध कराएगी। केंद्र शासित राज्यों के मामले में सरकार 100 प्रतिशत सहायता राशि उपलब्ध कराएगी। इस पूरी परियोजना की लागत 463.90 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार सहायता के तौर पर 332.24 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी।