राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव।
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केंद्र सरकार ने अब तक 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ डिजिटल पाइरेसी मामले में कार्रवाई की है। राज्यसभा में सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री डॉक्टर एल मुरुगन ने मंत्रालय से संबंधित प्रश्नों और पूरक प्रश्नों के जवाब दिए। डॉ. मुरुगन ने ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म पर परोसी जा रही आपत्तिजनक सामग्री को लेकर कहा कि सरकार की ओर से 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ यह कार्रवाई डिजिटल पाइरेसी के तहत की गई है। मुरुगन ने सदन को बताया कि आईटी एक्ट के तहत इसके लिए दिशा-निर्देश पहले से ही मौजूद हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म में आयु के अनुरूप सामग्री के प्रमाणीकरण पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। इसमें आयु के अनुसार बच्चों को माता-पिता के मार्गदर्शन के साथ-साथ सामग्री वर्गीकरण के लिए आयु को पैमाना बनाया गया है जो कि स्वयं निर्देशित व्यवस्था से संचालित है। वहीं, पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ मुरुगन ने कहा कि इसके लिए पीआईबी ने व्यापक व्यवस्था की है। उनके कल्याण के लिए खास इंतजाम है। दुर्घटना में आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। अगर कोई अनहोनी होती है तो पीड़ित परिवार को पूरी सहायता मिलती है। कोरोना में सौ फीसदी सहायता प्रभावितों को दी गई।
सरकार ने कहा, तथ्य जांच के लिए पीआईबी सबसे उपयुक्त
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेक इकाई पर पूछे गए सवालों पर शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार खुद से संबंधित किसी तथ्य की सत्यता का पता लगाने के लिए सबसे उपयुक्त निकाय है। वैष्णव ने कहा कि आईटी मध्यस्थ नियमों में संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, लेकिन मूल सिद्धांत यह है कि केंद्र से संबंधित कोई भी तथ्य के बारे में केवल सरकार ही बता सकती है कि यह सही तथ्य है या गलत। यही हमारा रुख है। आईटी मंत्रालय की तरफ से सूचना प्रौद्योगिकी नियमावली, 2021 के तहत 20 मार्च को फैक्ट चेक इकाई को अधिसूचित किया गया था। वैष्णव ने कहा कि क्षेत्रीय फैक्ट चेक इकाइयों के गठन की कोई योजना नहीं है।