राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में सरकार दो अहम बदलाव करने जा रही है जिसके बाद वैक्सीन की दो या बूस्टर खुराक से न सिर्फ आजादी मिलेगी बल्कि आगामी दिनों में देश का पहला ट्रैकिंग सिस्टम भी शुरू होगा। इसके माध्यम से सरकार को यह पता चलेगा कि वैक्सीन लगने के बाद कितने लोगों की मौत हुई? कितने अस्पताल में भर्ती हुए हैं और इन लोगों के शरीर में वैक्सीन के बाद क्या कुछ बदलाव आए हैं?
जानकारी के अनुसार टीकाकरण को लेकर गठित राष्ट्रीय टास्क फोर्स के विशेषज्ञों को इस बात के संकेत मिले हैं कि वैक्सीन की एकल खुराक के जरिये भी लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकता है। जॉनसन एंड जॉनसन और स्पूतनिक के अलावा इसमें कोविशील्ड टीका भी शामिल हो सकता है। इसीलिए विशेषज्ञों ने सिफारिश की है कि एकल खुराक को लेकर दो से तीन माह का एक परीक्षण होना चाहिए जिसमें शामिल लोगों के तीन महीने के दौरान जांच में एंटीबॉडी का पता लगाया जाएगा।
इसी टास्क फोर्स ने दूसरा सुझाव दिया है नेशनल वैक्सीन ट्रैकिंग सिस्टम को स्थापित करने का। यह ट्रैकिंग सिस्टम ऐसा होगा जिसके जरिये सरकार की निगरानी जिला और तहसील स्तर तक होगी जबकि अभी तक राज्य सरकार के मुख्यालय से होती है। इस सिस्टम के शुरू होने से सरकार को दोबारा संक्रमण, टीकाकरण के बाद मृत्युदर, टीकाकरण के बाद संक्रमण का पुरुष, महिलाओं में असर, आयुवार रिस्क फैक्टर इत्यादि के बारे में पता चल सकेगा।
जून में ही शुरू होगा अध्ययन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दोनों ही सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। ट्रैकिं ग सिस्टम तैयार करने के लिए भारत सरकार के आईटी विशेषज्ञों से मदद ली जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जून में ही यह ट्रैकिंग सिस्टम शुरू हो जाएगा। साथ ही अलग-अलग संस्थानों में एकल खुराक पर परीक्षण भी शुरू होगा जिसके लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की टीम काम कर रही है।
अमेरिका में चल रहा है सिस्टम, भारत में उससे भी बेहतर होगा
विशेषज्ञों के अनुसार टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटनाओं को लेकर अमेरिका के सीडीसी की ओर से एक सिस्टम संचालित किया जा रहा है। इसमें वैक्सीन लगने के बाद होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर हर दिन जानकारी एकत्रित की जाती है। भारत में भी ऐसा ही सिस्टम होगा लेकिन कोविन वेबसाइट की भांति यह और भी बेहतर होगा। इसकी मदद से एक-एक केस को रिपोर्ट करने में मदद मिलेगी।
एकल खुराक के संकेत मजबूत
राष्ट्रीय टास्क फोर्स के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि एकल खुराक को लेकर मजबूत संकेत मिल रहे हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत में अगले तीन से छह माह के भीतर यह सुविधा उपलब्ध होगी जब एक व्यक्ति दो या फिर तीसरी खुराक के रूप में बूस्टर वैक्सीन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अभी हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने तीसरी बूस्टर खुराक के लिए परीक्षण भी शुरू कर दिया है जिसे दो खुराक लेने के छह माह बाद लिया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पहली खुराक लेने के बाद ही ज्यादातर लोगों में एंटीबॉडी का पर्याप्त स्तर देखने को मिल रहा है।
अमेरिका को ऐसे मिली थी मदद
अमेरिका ने जब ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया तो उन्हें पता चला कि वैक्सीन लेने के बाद कुछ लोगों को संक्रमण हो सकता है। सीडीसी ने ईमेल के जरिए अमर उजाला को बताया कि उनके यहां 46 अमेरिकी राज्यों में 10,262 लोगों की सूचना ट्रैकिंग सिस्टम से मिली जिनमें से 6,446 (63 फीसदी) महिलाएं थीं। औसत रोगी की आयु 58 वर्ष थी। प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर, 2,725 (27फीसदी) वैक्सीन लेने वालों में दोबारा संक्रमण बिना लक्षण वाला था। 995 (10%) रोगियों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और 160 (2फीसदी) रोगियों की मृत्यु हो गई थी।
नेशनल वैक्सीन ट्रैकिंग सिस्टम पर काम चल रहा है। अगले दो से तीन-दिन में और जानकारी मिल जाएगी। यह भी सच है कि एकल खुराक को लेकर काम चल रहा है। जॉनसन एंड जॉनसन और स्पूतनिक की भांति एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) को लेकर भी परिणाम सामने आ सकते हैं।
- डॉ. एनके अरोड़ा, अध्यक्ष, एनटीएजीआई