विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहण की गई 67 एकड़ जमीन मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिये केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अब प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है। कुछ लोगों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है वहीं कुछ ने सरकार को ही आड़े हाथों लिया है।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहण की गई 67 एकड़ जमीन मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिये केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किये जाने का स्वागत किया है। विहिप ने कहा कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है।
केंद्र ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहण की गई 67 एकड़ जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिये न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह जमीन राम जन्मभूमि न्यास की है और यह किसी वाद में नहीं है। यह कदम सरकार का सही दिशा में उठाया गया कदम है और हम इसका स्वागत करते हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने सरकार के इस कदम को गैरकानूनी करार दिया है वहीं पक्षकार हासिम अंसारी ने अलग सुर अपनाते हुए कहा कि उन्हें केंद्र के इस कदम से कोई आपत्ति नहीं है। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा राम मंदिर का राग अलाप रही है।
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रया देते हुए कहा कि सरकार ने अधूरा काम किया है। अखाडा परिषद् के महंत नरेंद्र गिरी ने आरोप लगाया कि मुख्य न्यायधीश मंदिर का निर्माण नहीं होने देना चाहते। इससे पहले आरएसएस नेता ने साधु संतों से सुनवाई करने वाले जजों के यहां हल्ला बोलने की अपील की थी। केंद्र की याचिका को संत राम मंदिर के निर्माण की तयारी मान रहे हैं।
भाजपा के राम माधव ने रामजन्मभूमि की भूमि के अधिग्रहण से सम्बंधित इस याचिका का मुख्य विवाद से कोई लेना देना नहीं है। जमीन का अधिग्रहण 1993 में हुआ था। कोर्ट ने यथा स्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था इसलिए सरकार ने यह याचिका दाखिल की है।
केंद्र ने 1993 में विवादित 2.77 एकड़ भूमि के पास 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था।